8. पाकिस्तान का मुस्लिम विकल्प - Page 206

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अध्यायः 9

विदेशों से सीख

हिंदू, जो मुसलमानों की यह मांग मानने को तैयार नहीं हैं कि भारत को पाकिस्तान और हिंदुस्तान में विभाजित कर दिया जाए और जो भारत की भौगोलिक अखंडता को किसी भी मूल्य पर कायम रखने पर जोर देते हैं, अच्छा ही करेंगे यदि वे दूसरे उन देशों की नियति का अध्ययन करें जिन्होंने भारत के समान ही अनेक राष्ट्रों को आश्रय प्रदान किया और उनमें पारस्परिक सौहार्द के सृजन का प्रयास किया।

ऐसे सभी देशों के इतिहास की समीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। यहां उनमें से केवल दो देशों, अर्थात् तुर्की और चेकोस्लोवाकिया की कहानी का उल्लेख ही पर्याप्त होगा।

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पहले तुर्की को लीजिए। इतिहास बताता है कि मंगोलों ने तुर्की को उनके देश मध्य एशिया से 1230-40 ईसवी के बीच निकाल दिया था, जिससे वे अनातोलिया के पश्चिमोत्तर में जाकर बस गए। तुर्की साम्राज्य के निर्माता के रूप में उनकी भूमिका 1326 ई. में बू्रसा की विजय के साथ प्रारंभ हुई। 1360-61 में उन्होंने एजियन से काला सागर तक थ्रेसे को जीता। 1361-62 ई. में कोंस्टेंटीनोपल की विजेंटाइन सरकार ने उनकी प्रभुसत्ता स्वीकार की। बुल्गेरिया ने भी 1369 ई. में ऐसा ही किया। मकदूनिया पर उन्होंने 1371-72 में विजय पाई। 1373 ई. में कोंसेटेंटीनोपल ने पूर्ण रूप से ओटोमन की संप्रभुता स्वीकार की। 1389 में उन्होंने सर्बिया पर विजय प्राप्त की, जबकि 1430 में सालोनिका पर, 1453 में कांसेटेंटीनोपल, 1461 में त्रेबिजोंद तथा 1465 में कुरामान, और 1475 में काफफा तथा ताना पर अधिकार कर लिया। कुछ ही दिनों की शांति के बाद उन्होंने 1514 में मोसुल, और 1516-17 में सीरिया, मिस्र, हियाज़ और यमन पर विजय प्राप्त कर ली और 1521 में बेलग्राड पर अपनी विजय-पताका फहरा दी। इसके बाद 1526 में हंगरी और मोहाज़ जीत लिए गए। 1554 में बगदाद पर पहली विजय