200 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
1907 में तुर्की की यह स्थिति थी। उसके बाद उस पर जो कुछ गुजरा, वह उसकी दुर्भाग्यपूर्ण कहानी का दुखद अध्याय ही है। 1908 में युवा तुर्कों द्वारा की गई क्रांति का लाभ उठाकर ऑस्ट्रिया ने बोस्निया और हर्जेगोविना पर अधिकार जमा लिया और बल्गारिया ने अपनी आजादी की घोषणा कर दी। 1911 में इटली ने त्रिपोली पर और 1912 में फ्रांस ने मोरक्को पर अधिकार कर लिया। इटली द्वारा 1912 में किए गए सफल हमले से प्रोत्साहित होकर बल्गारिया, ग्रीस, सार्बिया और मोंटेनेग्रो ने मिलकर बाल्कान्स लीग का गठन कर तुर्की के विरुद्ध युद्ध घोषित कर दिया। इस युद्ध में, जिसे प्रथम बाल्कान्स युद्ध के नाम से जाना जाता है, तुर्की पूर्णतः पराजित हो गया। लंदन संधि (1913) से यूरोप में तुर्की-क्षेत्र घटकर कांस्टेंटीनोपल के इर्द-गिर्द एक संकुचित पट्टठ्ठी के रूप में सीमित होकर रह यगा। परंतु यह संधि प्रभावी नहीं हो सकी, क्योंकि विजेताओं में विजय की लूट के वितरण पर सहमति नहीं हो सकी। 1913 में बल्गारिया ने शेष बाल्कान्स लीग के विरुद्ध युद्ध घोषित कर दिया और रूमानिया ने अपने क्षेत्र का विस्तार करने की लालसा से बल्गारिया के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। तुर्की ने भी वैसा ही किया। बुखारेस्ट संधि (1913), जिसके द्वारा द्वितीय बाल्कान्स युद्ध समाप्त हुआ था, तुर्की ने एड्रियानोपल पुनः प्राप्त कर लिया और बल्गारिया से थ्रेस भी वापस ले लिया। सर्बिया ने उत्तरी मेसेडोनिया (मकदूनिया) पा लिया तो ग्रीस को दक्षिण मकदूनिया (सालोनिका समेत) प्राप्त हो गया, जबकि मोंटेनेग्रो ने तुर्की की कीमत पर अपने क्षेत्र का विस्तार किया। 1914 तक, जबकि यूरोपीय महायुद्ध छिड़ा, बाल्कान्स ने तुर्की से अपनी स्वतंत्रता अर्जित कर ली और यूरोप में जो क्षेत्र तुर्की साम्राज्य के तहत रह गया, वह वास्तव में कांस्टेंटीनोपल के इर्द-गिर्द संकुचित क्षेत्र और रूस में उसके अधिकार वाले क्षेत्र तक ही सीमित था। जहां तक अफ्रीका महाद्वीप का संबंध है, मिस्र और शेष उत्तरी अफ्रीका पर सुलतान की सत्ता नाममात्र को ही रह गई थी, क्योंकि यूरोपीय ताकतों ने उन पर वास्तविक नियंत्रण कर लिया था। 1914 के महायुद्ध में तुर्की का पूर्ण पराभव हो गया। भूमध्य क्ष्ज्ञेत्र से फारस की खाड़ी तक के सभी क्षेत्रों पर आक्रमण हुए और बगदाद, जेरूशलम, दमिश्क तथा अलेप्पो जैसे विख्यात नगरों पर कब्जा हो चुका था। यूरोप में मित्र सेनाओं ने कांस्टेंटीनोपल पर अधिकार कर लिया। सेवरेस की जिस संधि के द्वारा तुर्की के विरुद्ध युद्ध की समाप्ति हुई, उसके तहत उसे अपने सभी दूरवर्ती प्रांतों से तो वंचित होना ही पड़ा, एशिया माइनर का उपजाऊ मैदान भी गंवाना पड़ा। तुर्की की कीमत पर मेसेडोनिया, थ्रेस और एशिया माइनर क्षेत्रों पर ग्रीस के दावे को उदारतापूर्वक स्वीकार किया गया और इटली को एडालिया तथा दक्षिण में एक बड़ा भाग मिला। तुर्की को एशिया में अरब क्षेत्र, इराक, सीरिया, फिलस्तीन, हेजाज और नेज्द में तमा अरब प्रांत भी