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206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

में निर्वाचित राष्ट्रीय असेंबली के सदस्यों का समानुपातिक बहुमत भी शामिल है। इस तरह गणराज्य के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए संसद के सदस्यों के अनुपातिक बहुमत की सहमति भी अनिवार्य थी। इसके अलावा इस बात की पुष्टि करने के लिए कि केंद्रीय सरकार पर स्लोवाकों का विश्वास होना आवश्यक है, संविधान में यह प्रावधान भी किया गया कि संसद के एक-तिहाई स्लोवाक सदस्य अविश्वास, प्रस्ताव भी पेश कर सकते हैं।

ये संवैधानिक परिवर्तन चेकों की इच्छा के विरुद्ध लागू किए गए थे। चेकों और स्लोवाकों के बीच इससे एक ऐसा अंतर आ गया जो इससे पहले कभी नहीं था। परंतु यह इस आशा से किए गए थे कि दोनों के बीच जो अपेक्षाकृत मामूली विवाद हैं वे मार्ग में रोड़ा नहीं बनेंगे और स्लोवाकों का राष्ट्रवाद ही उन्हें चेकों के और अधिक निकट लाएगा। स्लोवाकिया को एक स्वतंत्र स्तर का दर्जा देने के लिए किए गए संवैधानिक परिवर्तन तथा यह तथ्य कि ऐसे दर्जे की गारंटी स्वयं स्लोवाकों की सहमति के बिना नहीं बदली जा सकेगी, यह आश्वस्त करते थे कि चेकों के विलय से स्लोवाकों की राष्ट्रीय पहचान के विलुप्त होने का कोई सवाल नहीं है। विभेदात्मक चिह्न से लागू हुई स्वायत्तता से सांस्कृतिक धाराएं पृथक हो गईं और स्लोवाक अपने रंग से वंचित होने से बच गए।

नए संविधान के तहत निर्वाचित प्रथम स्लोवाक संसद का उद्घाटन 18 जनवरी, 1939 को हुआ, और संसद के अध्यक्ष डॉ. मार्टिन सोकोल ने घोषणा की - फ्स्लोवाकों की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष की अवधि समाप्त हो गई है। अब राष्ट्रीय पुनर्जन्म का काल प्रारंभ हो गया है।य् इसके बाद जो अन्य भाषण हुए उनमें भी यह संकेत दिया गया कि अब जबकि स्लोवाकों को स्वायत्तता प्राप्त हो गई है, वे चेकों के प्रति कभी वैमनस्य महसूस नहीं करेंगे और दोनों ही चेक-स्लोवाक राज्य के प्रति निष्ठावान रहेंगे। स्लोवाक संसद का उद्घाटन हुए अभी एक माह भी नहीं बीता था कि स्लोवाक राजनीतिज्ञों ने विभेद के विरुद्ध तथा पूर्ण पृथकता के लिए अपना संघर्ष प्रारंभ कर दिया। उन्होंने उत्तेजक भाषण दिए, जिनमें चेकों की आलोचना की गई, चेकों द्वारा उनका दमन करने का दोषारोपण किया गया और स्लोवाकिया के लिए पूर्ण स्व्तंत्रता की मांग भी की गई। मार्च के प्रारंभ होते-होते स्लोवाकिया में विभिन्न रूपों में पृथकतावाद ने चेकोस्लोवाकिया राज्य की अखंडता को ही गंभीर खतरा उपस्थित कर दिया। 9 मार्च को यह विदित हुआ कि स्लोवाक प्रधानमंत्री टिसो ने स्लोवाकिया की पूर्ण स्वाधीनता की घोषणा करने का निश्चय कर लिया है। इस कार्यवाही का पूर्वाभास होने पर 10 मार्च को स्लोवाकिया में सेनाएं भेज दी गईं और गणरज्य के राष्ट्रपति डॉ. हाचे ने प्रधानमंत्री टिसो को अन्य स्लोवाक मंत्रियों सहित बर्खास्त कर