1. लीग की मांगे क्या हैं? - Page 22

एक राष्ट्र का अपने घर के लिए आह्वान

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सोच है। यह एकत्व की एक समन्वित भावना की अनुभूति है, जो उन लोगों में जो इससे अभिभूत हैं परस्परता की भावना और उनमें यह अनुभूति जगाती है कि वे एक ही तरुवर के फूल हैं। यह राष्ट्रीय अनुभूति एक दुधारी अनुभूति है। यह जहां अपने प्रियजनों के प्रति अपनत्व की अनुभूति है, वहीं जो एक व्यक्ति के अपने प्रियजन नहीं हैं, उनके प्रति अपनत्व-विरोधी अनुभूति भी है। यह एक प्रकार के बोध की अनुभूति है, जो एक ओर जिनमें यह है, उन्हें एकता के इतने मजबूतसूत्र में बांधती है कि आर्थिक विभिन्नताओं अथवा सामाजिक वर्गीकरण से उद्भूत सभी मतभेदों पर विजय पा जाती है। दूसरी ओर, उन्हें यह उन लोगों से अलग भी करती है जो उनके जैसे नहीं हैं। यह किसी अन्य समूह से संबद्ध नहीं होने का भावबोध भी जगाती है। यही राष्ट्रीयता और राष्ट्रीय भावना का सार-तत्व है।

अब इस कसौटी पर मुस्लिम दावे को कसिए। क्या यह तथ्य है या नहीं कि भारत का मुसलमान एक विशिष्ट समुदाय है? क्या यह हकीकत है या नहीं कि उनमें एक प्रकार की संचेतना है? क्या यह वास्तविकता है या नहीं कि हर मुसलमान यह सोच रखता है कि वह अपने स्वयं के समुदाय से संबद्ध है, किसी गैरमुस्लिम समुदाय से नहीं?

यदि इन प्रश्नों का उत्तर सकारात्मक है, तब तो विवाद समाप्त ही हो जाना चाहिए और मुसलमानों का यह दावा बिना किसी संकोच के मान लिया जाना चाहिए।

हिन्दुओं को यह दर्शाना चाहिए कि कुछ मतभेदों के बावजूद हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पर्याप्त समानताएं हैं, जिससे वे एक राष्ट्र की रचना कर सकते हैं। अथवा सरल भाषा में, मुसलमानों और हिंदुओं की उस एकजुटता को यह दर्शाती है, जो बहुत समय से चली आ रही है।

जो हिंदू इस दृष्टिकोण से असहमत हैं कि मुसलमान अपने आपको एक पृथक राष्ट्र मानते हैं, वे भारतीय सामाजिक जीवन की कतिपय विशिष्टताओं पर निर्भर करते हैं, जो मुस्लिम और हिंदू समाज को एकता के सूत्र में बांधती हुई लगती है।

पहली बात जो कही जाती है, वह यह है कि हिंदुओं और मुसलमानों में जाति का कोई अंतर नहीं है_ कि पंजाबी मुसलमान और पंजाबी हिंदू, बिहारी मुसलमान और बिहारी हिंदू, बंगाली मुसलमान और बंगाली हिन्दू, मद्रास का मुसलमान और वहां का हिंदू, बंबई का मुसलमान और बंबई का हिंदू जातीय तौर पर एक ही समूह के हैं। वस्तुतः मद्रास के मुसलमान और मद्रास के ब्राह्मण में - मद्रासी ब्राह्मण और पंजाबी ब्राह्मण की अपेक्षा कहीं अधिक सजातीयता पाई जाती है। दूसरी बात यह है कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाषायी एकता पर जोर दिया जाता है। यह कहा जाता है कि मुसलमानों की अपनी कोई समान भाषा नहीं है जो उन्हें हिंदुओं