222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
रासिल, जो रिजाल का भ्रष्ट रूप है, ‘बेकार’ कहा जाता है। कुछ स्थानों
पर एक तीसरा वर्ग ‘अरज़ल’ भी है, जिसमें आने वाले व्यक्ति सबसे नीच
समझे जाते हैं। उनके साथ कोई भी अन्य मुसलमान मिलेगा-जुलेगा नहीं
और न उन्हें मस्जिद और सार्वजनिक कब्रिस्तानों में प्रवेश करने दिया जाता
है।
इन वर्गों में भी हिंदुओं में प्रचलित जैसी सामाजिक वरीयता और जातियां हैं।
1. ‘अशरफ’ अथवा उच्च वर्ग के मुसलमान
( i ) सैयद
( ii ) शेख
( iii ) पठान
( iv ) मुग़्ाल
( v ) मलिक
( vi ) मिजऱ्ा
2. ‘अजलफ’ अथव निम्न वर्ग के मुसलमान
( i ) खेती करने वाले शेख और अन्य वे लोग जो मूलतः हिंदू थे, किंतु
किसी बुद्धिजीवी वर्ग से संबंधित नहीं हैं और जिन्हें अशरफ समुदाय,
अर्थात् पिराली और ठकराई आदि में प्रवेश नहीं मिला है।
( ii ) दर्जी, जुलाहा, फकीर और रंगरेज।
( iii ) बाढ़ी भटियारा, चिक, चूड़ीदार, दाई, धावा, धुनिया, गड्डी, कलाल,
कसाई, कुला, कुंजरा, लहेरी, माहीफरोश, मल्लाह, नालिया, निकारी।
( iv ) अब्दाल, बाको, बेडि़यां, भाट, चंबा, डफाली, धोबी, हज्जाम, मुचो,
नगारची, नट, पनवाडि़या, मदारिया, तुन्तिया।
3. ‘अरजल’ अथवा निकृष्ट वर्ग
स्टडीज इन मोहमडनिज्म, पृ. 34-35
तथैव, अध्याय XXXIX
दि कुरान, इट्स कम्पोजीशन एंड टीचिंग, पृ. 58