10. सामाजिक निष्क्रियता - Page 239

230 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

के खिलाफ श्रमिक के संघर्ष में सहभागी बना तो वह मुस्लिम मिल-मालिक की भावनाओं को आघात पहुंचाएगा। वह इस बारे में सजग है कि किसी धनी मुस्लिम, मुस्लिम जमींदार अथवा मुस्लिम मिल-मालिक को आघात पहुंचाना मुस्लिम समुदाय को हानि पहुंचाना है और ऐसा करने का तात्पर्य हिंदू समुदाय के विरुद्ध मुसलमानों के संघर्ष को कमज़ोर करना ही होगा।

भारतीय रियासतों में राजनीतिक सुधारों के प्रति मुस्लिम नेताओं का रुख यह दर्शाता है कि मुस्लिम राजनीति किस तरह विकृत हो गई। मुसलमानों और उनके नेताओं ने कश्मीर के हिंदू राज्य में प्रतिनिधि सरकार की स्थापना के लिए प्रचंड आंदोलन चलाया था। वे ही मुसलमान और वे ही नेता अन्य मुस्ल्मि रियासतों में प्रतिनिधि सरकारों की व्यवस्था लागू किए जाने के घोर विरोधी हैं। इस विचित्र रवैये का कारण बड़ा सीधा सा है। हर मामले में मुसलमानों के लिए निर्णायक प्रश्न यही है कि उसका हिंदुओं की तुलना में मुसलमानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि प्रतिनिधि सरकार से मुसलमानों को सहायता मिली हो तो वे उसकी मांग करेंगे और उसके लिए संघर्ष भी करेंगे। कश्मीर रियासत में शासक हिंदू है, किंतु प्रजाजनों में बहुसंख्यक मुसलमान हैं। मुसलमानों ने कश्मीर में प्रतिनिधि सरकार के लिए संघर्ष इसलिए किया क्योंकि कश्मीर में प्रतिनिधि सरकार से तात्पर्य है हिंदू राज्य से मुस्लिम आवाम के लिए सत्ता का हस्तांतरण। अन्य मुस्ल्मि रियासतों में शासक मुसलमान, परंतु अधिसंख्य प्रजाजन हिंदू हैं। ऐसी रियासतों में प्रतिनिधि सरकार का तात्पर्य होगा मुस्लिम शासक से सत्ता का हिंदू प्रजा को हस्तांतरण। और इसी कारण एक मामले में मुसलमान प्रतिनिधि सरकार की व्यवस्था का समर्थन करते हैं, जबकि दूसरे में विरोध। मुसलमानों की सोच में लोकतंत्र प्रमुखता नहीं है। उनकी सोच को प्रभावित करने वाला तत्व यह है कि लोकतंत्र प्रमुख नहीं है। उनकी सोच को प्रभावित करने वाला तत्व यह है कि लोकतंत्र, जिसका मतलब बहुमत का शासन है, हिंदुओं के विरुद्ध संघर्ष में मुसलमानों पर क्या असर डालेगा। क्या उससे वे मजबूत होंगे अथवा कमजोर? यदि लोकतंत्र से वे कमजोर पड़ते हैं तो वे लोकतंत्र नहीं चाहेंगे। वे किसी मुस्लिम रियासत में हिंदू प्रजा का मुस्लिम शासक की पकड़ कमजोर करने के बजाए अपने निकम्मे राज्य को वरीयता देंगे।

मुस्लिम संप्रदाय में राजनीतिक और सामाजिक गतिरोध का केवल एक ही कारण बताया जा सकता है। मुसलमान सोचते हैं कि हिंदुओं और मुसलमानों को सतत संघर्षरत रहना चाहिए। हिंदू मुसलमानों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास करते हैं, और मुसलमान अपनी शासक होने की ऐतिहासिक हैसियसत बनाए रखने का। इस संघर्ष में शक्तिशाली ही विजयी होगा, और अपना शक्तिशाली होना सुनिश्चित करने