236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
पक्ष ने धर्मांतरण कर लिया है, उसे विवाह भंग करने का अधिकार
प्राप्त हो गया है।.........इस अधिनियम के अतिरिक्त अन्य समुदायों के
बारे में, हम नेटिव कनवर्ट्स मैरिज डिसोलूशन एक्ट-1886, अधिनियम
XXI से विवाह संबंधों पर धर्मांतरण के प्रभाव का जायजा ले सकते
हैं.....यह भारत के सभी समुदायों पर लागू होता है और यह कानून इस
तथ्य को मान्यता देता है कि किसी भारतीय के मात्र ईसाई हो जाने से ही
विवाह नहीं टूट जाएगा, बल्कि उसे न्यायालय में जाना होगा, जहां वह यह
कह सके कि दूसरे पक्ष को जिसने धर्मांतरण नहीं किया है, उसके प्रति
वैवाहिक दायित्वों को निभाना चाहिए.......तब उन्हें एक वर्ष का समय दिया
जाता है और न्यायाधीश उन्हें निर्देश देता है कि कुछ अन्य व्यक्तियों की
उपस्थिति में वे एक-दूसरे से बातचीत करेंगे, ताकि उनमें वैवाहिक संबंध
फिर से बहाल हो सकें, और यदि वे सहमत नहीं होते तो अपवित्रीकरण
के आधार पर विवाह भंग हो जाता है। विवाह निस्संदेह टूट जाता है, परंतु
आस्था या धर्म बदल लेने मात्र के आधार पर नहीं। अतएव भारत में प्रत्येक
समुदाय ने इस मान्य सिद्धांत को अपनाया है कि दूसरा धर्म ग्रहण कर लेने
मात्र से ही विवाह-विच्छेद को नहीं माना जा सकता।य्ऽ
असेंबली के एक अन्य मुस्लिम सदस्य और विधेयक के पक्षधर सैयद गुलाम बिख नैरांग ने तो और भी अधिक खुलकर तथा बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी। विधेयक के सिद्धांत के समर्थन में उन्होंने कहाः
फ्बहुत लंबे समय से ब्रिटिश भारत में अदालतों ने बेहिचक और बिना
किसी शर्त के यह निर्णय दिया है कि समस्त परिस्थितियों में स्वधर्म-त्याग
में स्वतः और तत्काल, और बिना किसी न्यायिक कार्यवाही या न्यायालय
के निर्णय अथवा किसी अन्य धार्मिक औपचारिकता की बाधा के बिना
ही, वैवाहिक स्थिति समाप्त हो जाती है। न्यायालय यही रुख अपनाते रहे
हैं। प्रायः इस मुद्दे पर हनफी न्यायविदों के तीन विशिष्ट दृष्टिकोण रहे हैं।
इनमें से एक दृष्टिकोण को, जिसे बोखारा न्यायविदों का मत बताया जाता
है, स्वीकार कर लिया गया था, उसे पूर्ण रूप में नहीं, बल्कि मेरी राय में
उसे तोड़-मरोड़ और काट-छांटकर अपनाया गया है। बोखारा मत के बारे
में श्री काज़मी और कुछ अन्य वक्ता पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। बुखारा
न्यायविदों का कहना है कि विवाह धर्म बदल लेने से टूट जाता है। वास्तव
में मैं और अधिक ठोस शब्दों में इसे स्पष्ट कर रहा हूं - मैं अधकित रूप