11. सांप्रदायिक आक्रामकता - Page 264

साम्प्रदायिक आक्रामकता 255

(11) दक्षता की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, राज्य की सेवाओं तथा स्वशासी

निकायों की सभी नौकरियों में दूसरे भारतीयों के अनुपात में मुसलमानों की

पर्याप्त हिस्सेदारी का प्रावधान संविधान में किया जाना चाहिए। (12) मुस्लिम धर्म, शिक्षा, भाषा, संस्कृति, व्यत्तिQगत मुस्लिम कानून तथा मुस्लिम

खैराती संस्थाओं के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए, तथा उन्हें राज्य सरकारों

तथा स्वशासी संस्थाओं से प्राप्त होने वाले अनुदान को सुनिश्चित करने के

लिए, संविधान में पर्याप्त प्रावधान किया जाना चाहिए।

(13) केन्द्र अथवा प्रांत सरकारों में ऐसे किसी मंत्रिमंडल का गठन नहीं किया जाना

चाहिए जिनमें मुसलमान मंत्रियों की एक तिहाई सदस्यता न हो। (14) संविधान में भारतीय संघ के प्रांतों की विधायिकाओं की सहमति के बिना

किसी प्रकार का भी संशोधन नहीं किया जाना चाहिए।

(15) वर्तमान परिस्थितियों में, देश की विभिन्न विधायिकाओं तथा अन्य निर्वाचित

निकायों में, पृथक निर्वाचक-मंडलों के जरिए मुसलमानों का प्रतिनिधित्व

अनिवार्य है, और साथ ही चूंकि सरकार मुसलमानों को इस अधिकार से वंचित

न करने के लिए वचनबद्ध है, यह अधिकार उनकी सहमति के बिना उनसे

नहीं लिया जा सकता, और जब तक कि मुसलमान संतुष्ट न हों कि उपरोक्त

प्रकार से उनके अधिकारों और हितों की रक्षा की गयी है, तब तक वे संयुक्त

निर्वाचक-मंडल सशर्त अथवा बिना शर्त गठन की सहमति नहीं देंगे।

नोटः जिन प्रांतों में मुसलमान अल्पमत में होते हुए भी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व रखते हैं, उनकी चर्चा आगे की जाएगी।

मुसलमानों की मांगों का यह एक समेकित विवरण है। इसमें कुछ तो पुरानी और कुछ नयी मांगें हैं। पुरानी मांगों को इसलिए शामिल किया गया है कि जो लाभ उनसे प्राप्त हो रहे हैं वे यथावत रहें। मुसलमानों की स्थिति में जो कमजोरियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए नयी मांगें रखी गयी हैं। कुल पांच नयी मांगे की गयी हैः- (1) पंजाब और बंगाल के प्रांतों में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाना। (2) केन्द्रीय और प्रांतीय मंत्रिमंडलों में मुसलमानों को एक-तिहाई स्थान दिया जाना। (3) सेवाओं में मुसलमानों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना।

(4) सिंध को बम्बई पे्रसिडेंसी से अलग करना और उत्तर-पश्चिम सीमाप्रांत तथा

बलूचिस्तान को स्व-शासित राज्य का स्तर प्रदान करना।