11. सांप्रदायिक आक्रामकता - Page 265

256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(5) केन्द्रीय सरकार के बजाए प्रान्तीय सरकारों में अवशिष्ट शत्तिQयों को निहित्त

करना।

नयी मांगों में से 1, 4, तथा 5 को छोड़कर अन्य अपने आप में स्पष्ट हैं। मांग 1 तथा 4 में अंतर्निहित उद्देश्य, चार प्रान्तों में जहाँ मुसलमानों को अब तक साम्प्रदायिक बहुमत प्राप्त रहा है उन्हें कानूनी तौर पर बहुमत प्रदान किया जाना है जिससे अन्य छः हिन्दू बहुमत वाले प्रांतों में हिन्दुओं की शत्तिQ को संतुलित कर दिया जाए। परन्तु आशंका थी कि ऐसी केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत, जिसे हिन्दुओं के नियंत्रण में रहना ही था, क्या इन चार मुस्लिम प्रान्तों में मुस्लिम बहुसंख्यकों का प्रभावी शासन हो जाता। हिन्दू सम्प्रदाय से नियंत्रित केन्द्रीय शासन से मुस्लिम प्रान्तों को विमुत्तQ करने के लिए ही मांग संख्या 5 रखी गयी थी।

हिन्दुओं द्वारा इन मांगों का विरोध किया गया। इसमें कोई खास बात नहीं थी, परन्तु अर्थपूर्ण बात यह थी कि साईमन कमीशन ने भी इन मांगों को खारिज कर दिया था। साईमन कमीशन ने, जो मुसलमानों के प्रति किसी भी प्रकार अमैत्रीपूर्ण नहीं था, मुसलमानों की मांगों को अस्वीकृत करने के पीछे कुछ माकूल तर्क दिया। कमीशन ने कहाऽः-

फ्इस दावे का अर्थ इन छः प्रान्तों में मुसलमानों को अब तक जो प्रतिनिधित्व

दिया गया है उनको पृथक सुरक्षित रखते हुए, बंगाल और पंजाब के प्रांतों में

जनसंख्या के समानुपात में अलग निर्वाचक-मण्डल के कारण उन्हें जितना

स्थान प्राप्त हुआ है, उसमें भी अभिवृद्धि करना है। इससे, दोनों की प्रान्तों

में, मुसलमानों को संयुत्तQ निर्वाचन-मण्डल के स्थानों में भी एक निर्धारित

तथा अपरिवर्तनीय बहु-संख्या प्राप्त हो जाती है। हम इस हद तक नहीं जा

सकते। दोनों सम्प्रदायों के बीच, किसी नए सामान्य समझौते की अनुपस्थिति

में, छः प्रान्तों में उनके प्राधान्य के स्तर को बंगाल और पंजाब में सीटों के

मौजूदा आवंटन से इतना दूर हटकर, संगत रूप नहीं दिया जा सकता।

फ्यह ओचित्यपूर्ण नहीं होगा कि मुसलमानों के पक्ष में संपूर्ण रूप

से छः प्रान्तों में उस खास महत्ता को कायम रखा जाए, जो इस समय उन्हें

प्राप्त है और इसके साथ-साथ हिन्दू और सिक्खों के विरोध के बावजूद,

पंजाब और बंगाल में उन्हें एक सुनिश्चित बहुमत भी प्रदान कर दिया जाए,

जिसके सम्बन्ध में निर्वाचकों से भी पुनर्विचार करने का अनुरोध नहीं किया

जा सकता।य्

ऽ प्रतिवेदन, खंड दो, पृ. 71