258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
मुसलमानों को जो ये सब राजनीतिक बख्शीशें ब्रिटिश सरकार के द्वारा दी गयीं उनकी सुरक्षा निश्चित नहीं थी तथा मुसलमानों को यह आशंका थी कि हिन्दू सम्प्रदाय द्वारा मुसलमानों पर या महामहिम की सरकार पर यह दबाव डाला जा सकता है कि मुसलमानों को प्रदान की गयी इन बख्शीशों की शर्तों को बदल दिया जाए। इस आशंका के पीछे दो कारण थे। पहला कारण था, श्री गांधी द्वारा आमरण अनशन का दबाव देकर पंचाट के उस भाग को बदलवा देने में उन्हें मिली सफलता ख्1,, जिसका सम्बन्ध दलित समुदाय से था। दूसरा कारण हाऊस ऑफ कॉमंस द्वारा भारत सरकार विधेयक के खंडों में किए गए वे संशोधन थे जिनके अंतर्गत रियायतों के उपबन्धों में खास परिस्थितियों में परिवर्तन कर दिया जाना संभव हो गया था। ख्2,
इन आशंकाओं को दूर करने के लिए तथा मुसलमानों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने के विचार से, जिससे कि उन्हें अब तक जितनी रियायतें दी गयी हैं उनमें अनुचित शीघ्रता कर संशोधन नहीं किया जाये, महामहिम की सरकार ने, भारत सरकार को यह विज्ञप्ति जारी करने के लिए प्राधिकृत किया ख्3, -
फ्महामहिम की सरकार के ध्यान में यह बात आयी है कि एक धारणा
फैल रही है कि भारत सरकार विधेयक में जो धारा 304 (मसविदे को
प्रथम बार प्रस्तुत करने के समय इसकी संख्या 285 थी, तथा कामंस सभा
की समिति में जब विधेयक में संशोधन किया गया तो इसकी संख्या 299
थी) के रूप में अभी है, उसे कामंस सभा में विधेयक पारित करने की
प्रक्रिया में इस प्रकार संशोधित कर दिया गया है कि महामहिम की सरकार
को असीमित अधिकार प्राप्त हो गया है कि जब वह उचित समझे, सरकार
के कम्यूनल अवार्ड में परिवर्तन कर सकती है।
फ्महामहिम की सरकार यह वांछनीय समझती है कि इस प्रकार का
एक संक्षिप्त स्पष्टीकरण दिया जाए कि दोनों ही बातें, कम्यूनल अवार्ड
में कोई भी परिवर्तन और, इस तरह के किसी भी परिवर्तन के संदर्भ में
सरकार की नीति, धारा 304 से उठती हैं।
फ्इस धारा के अंतर्गत भारत की सरकारों तथा विधायिका सभाओं
को दस वर्ष की अवधि व्यतीत हो जाने के उपरान्त, विधायिका सभाओं
के गठन के सम्बन्ध में, जिसमें कम्यूनल अवार्ड के अध्यधीन प्रश्न भी
शामिल हैं, संशोधन के लिए पहल करने का अधिकार दिया गया है।
- इसके परिणामस्वरूप पूना समझौता हुआ जिस पर 24 सितंबर, 1932 को हस्ताक्षर किए गये।
- पंचाट के मुस्लिम भाग में संशोधन किए जाने के प्रयत्नों के लिए देखिए ‘आल इंडिया रजिस्टर’ 1932,
खंड दो, पृष्ठ 281-315
- विज्ञप्ति दिनांक 2 जुलाई, 1935, शिमला