18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
भारत पर हमला करने वाले मुहम्मद बिन कासिम और औरंगजेब सरीखे शासकों को अपना राष्ट्र-पुरुष स्वीकार करते हैं।य् धार्मिक क्षेत्र में हिंदू रामायण, महाभारत और गीता से प्रेरणा लेते हैं, तो दूसरी ओर मुसलमान कुरान और हदीस से प्रेरणा लेते हैं। इस तरह, जोड़ने वाले तत्वों की तुलना में अलग करने वाली बातें अधिक हावी हैं। हिंदू और मुस्लिम सामाजिक जीवन में समान भाषा समान जाति और समान देश जैसे कतिपय सांझा अभिलक्षणों पर भरोसा करके, तथा जो कुछ संयोगजनित और दिखावटी है उसे अनिवार्य और मौलिक मानकर, हिंदू भूल कर रहे हैं। राजनीतिक और धार्मिक प्रतिद्वंद्विता उन तथाकथित सामूहिक बंधनों की अपेक्षा अधिक गहन है जो उन्हें एक सूत्र में बांध सकते हैं। यह संभावना उस स्थिति में संभवतः भिन्न हो सकती है जब दोनों ही समुदाय इस अतीत को विस्मृत कर दें। रेनन विस्मृत कर देने की प्रवृत्ति को राष्ट्र के निर्माण में अधिक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं। उनका कथन हैः
फ्विस्मरणीयता, और मैं तो यह भी चाहूंगा कि ऐतिहासिक भूल, राष्ट्र के
निर्माण में एक अनिवार्य घटक है और यह इसलिए कि ऐतिहासिक अध्ययनों
की प्रगति राष्ट्रीयता के लिए अक्सर खतरनाक भी हो सकती है। ऐतिहासिक
अनुसंधान, वस्तुतः हिंसा के उन कृत्यों को पुनः उजागर करता है जो सभी
राजनैतिक रचनाओं के अवसर पर होते हैं, ऐसे मामलों में भी जिनकी
परिणतियां अत्यंत लाभदायक हो सकती थीं। कू्ररता से एकता कभी
स्थापित नहीं हो पाती। उत्तरी और दक्षिणी फ्रांस का संघ विध्वंस और
आतंक के एक दौर का परिणाम था। यह दौर लगभग एक सौ वर्ष तक
चला। फ्रांस नरेश, जिसके बारे में कहा जा सकता है कि वह धर्मनिरपेक्ष
आदर्श का स्रष्टा था फ्रांस नरेश जिसने पूर्ण राष्ट्रीय एकता को स्थापित
किया था, उस समय अपनी गरिमा खोता हुआ लगा जब उसे अत्यंत
निकटता से देखा गया। उसने जिस राष्ट्र का गठन किया था, वही उसके
लिए अभिशाप बन गया और जो कुछ किया, उसका ज्ञान आज केवल
संस्कृत जन को ही है।
फ्तुलना करने से ही पश्चिमी यूरोपीय इतिहास के ये महान कानून
स्पष्ट हो पाते हैं। फ्रांस नरेश ने अंशतः अपने न्याय से जो प्रशंसनीय
उपलब्धियां अर्जित कीं, वे अनेक देशों के लिए विनाशक सिद्ध हुइंर्। सेंट
स्टीफन के ताज के तहत, मगयार और स्लाव उतने ही पृथक रहे जितने
कि आठ सौ वर्ष पूर्व थे। अपने प्रभुत्व-काल के तहत विभिन्न तत्वों को
एकजुट करने की अपेक्षा हॉप्सवर्ग गृह ने उन्हें परस्पर अलग और एक
दूसरे के प्रायः विरुद्ध ही रखा। बोहमिया में ‘चैक’ तत्व एक ही गिलास में
तेल और पानी मिलाने की तरह थोप दिए गए। धर्म के आधार पर राष्ट्रों