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साम्प्रदायिक आक्रामकता 265

अधिक ही मुसलमानों को दिया गया। गोलमेज सम्मेलन की अल्पसंख्यक उप-समिति में सर मुहम्मद शफी ने दो अलग-अलग प्रस्ताव रखे।

6 जनवरी, 1931 के अपने भाषण में, सर मुहम्मद शफी ने साम्प्रदायिक समझौते के आधार के रूप में निम्नलिखित प्रस्ताव रखाऽः-

फ्हम लोग उन शर्तों पर जिनका मैंने उल्लेख किया है, संयुत्तQ निर्वाचक-मण्

डल स्वीकार करने के लिए तैयार हैंः उन प्रांतों में जहाँ मुसलमान

अल्पसंख्या में हैं वहाँ वर्तमान में जिन अधिकारों का वे उपभोग कर रहे

हैं, उन्हें यथावत रखा जाए तथा बंगाल और पंजाब में जनसंख्या के आधार

पर दो संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल का और प्रतिनिधित्व होना चाहिए। सीटों के

आरक्षण के सिद्धान्त को मौलाना मोहम्मद अली की शर्तों के साथ संयुक्त

रूप से प्रवर्तित करना चाहिए।य् [†]

इसी समिति के समक्ष 14 जनवरी, 1931 को दिए गए अपने भाषण में उन्होंने अलग शर्तें रखीं। उन्होंने कहा’’ः-

फ्यह शर्त रखने के लिए आज मुझे प्राधिकृत किया गया है कि पंजाब में

साम्प्रदायिक निर्वाचक-मंडलों के माध्यम से मुसलमानों को संपूर्ण सदन

की कुल सदस्यता का 49 प्रतिशत भाग दिया जाए तथा उन्हें यह छूट भी

दी जाए कि उस प्रान्त में सृजित होने वाले विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों से भी

वे चुनाव लड़ सकेंगे। जहाँ तक बंगाल का प्रश्न है, वहाँ मुसलमानों को

साम्प्रदायिक निर्वाचक-मंडलों के माध्यम से संपूर्ण सदन की सदस्यता में 46

प्रतिशत सदस्यता दी जाए तथा सृजित होने वाले विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों से

भी उन्हें लड़ने की छूट दी जाए। उन प्रान्तों में जहाँ मुसलमान अल्पसंख्या

में हैं, वहाँ अलग निर्वाचक-मण्डल की विधि से इस समय जो महत्ता उन्हें

प्राप्त है, उसे वैसा ही रखा जाए, तथा हमारे हिन्दू भाईयों को सिंध में इसी

प्रकार की महत्ता तथा हिन्दू और सिक्ख भाईयों को उत्तर पश्चिम सीमांत

प्रान्त में भी इसी प्रकार की महत्ता दी जाए। इसके बाद किसी भी समय,

यदि प्रांतीय विधान परिषदों में किसी सम्प्रदाय के दो-तिहाई सदस्य तथा

केन्द्रीय विधान परिषदों के किसी सम्प्रदाय के दो-तिहाई सदस्य, साम्प्रदायिक

निर्वाचक-मण्डल को तिलांजलि देना चाहें तथा संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल

ऽ पहले गोलमेज सम्मेलन की अल्पसंख्यक उप-समिति की रिपोर्ट (भारतीय संस्करण) पृष्ठ 96 † मि. मोहम्मद अली का नुस्खा यह था कि संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल तथा आरक्षित सीटों का सिद्धांत इस

शर्त के साथ लागू किया जाये कि विजित सदस्य को अपने समुदाय का न्यूनतम 40 प्रतिशत और दूसरे

सम्प्रदायों का 5 या 10 प्रतिशत मत प्राप्त करना अनिवार्य होगा।