11. सांप्रदायिक आक्रामकता - Page 275

266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

स्वीकार करना चाहें, तब उस स्थिति में संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल को अस्तित्व

में आ जाना चाहिए।य्

दोनों प्रस्तावों का अंतर स्पष्ट है। फ्संयुत्तQ निर्वाचक मंडल यदि उसके पीछे कानूनी बहुमत है। यदि कानूनी बहुमत नहीं होता है, उस स्थिति में अलग निर्वाचक-मण् डल सहित अल्पसख्यक सीटें।य् ब्रिटेन की सरकार ने प्रथम मांग से कानूनी बहुमत तथा दूसरी मांग से अलग निर्वाचक-मण्डल को लिया और दोनों ही को मुसलमानों ने स्वीकार कर दिया।

ध्यान देने वाली दूसरी बात हिन्दुओं की कमजोरियों से लाभ उठाने की मुसलमानों की भावना है। हिन्दू यदि कहीं विरोध करते हैं, तब पहले तो मुसलमान अपनी बात पर अड़ते हैं और उसके बाद हिन्दू जब मुसलमानों को कुछ दूसरी रियायतें देकर मूल्य चुकाने के लिए तैयार होते हैं तब मुसलमान जिद छोडत़े हैं। इसको बतलाने के लिए, अलग तथा संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डलों के प्रश्न का प्रसंग दिया जा सकता है। मेरे विचार से खासकर उन राज्यों में जहाँ मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल के लिए लड़ना नितांत मूर्खता है। संयुत्तQ मतदाता सूची राष्ट्रीयता का आधार कभी नहीं बन सकती है। राष्ट्रीयता का सम्बन्ध राजनीतिक या दूसरे लेनदेन से नहीं हुआ करता है। इसका अतिसाधारण कारण यह है कि एकता बा“य तत्वों के मात्र जोड़-घटाव पर आधारित नहीं होता है। जहाँ पांच वर्ष के लिए भी दो भिन्न सम्प्रदाय के लोग जिनकी जीवन-शैली अलग-अलग प्रकार की और अपने भीतर ही सीमित रहने की होती है, एकीकृत होकर संयुत्तQ नहीं होंगे, क्योंकि उनको पांच वर्षों में केवल एक दिन, अर्थात् मतदान तिथि को ही एकीकृत और संयुत्तQ होने के लिए आहूत किया जाता है। संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल स्वतः राष्ट्रीयता की भावना पैदा नहीं कर सकते हैं। ये बहुसंख्यक समुदाय के द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय को मात्र गुलाम बनाए रखने की स्थिति ही उत्पन्न कर सकते हैं जैसा कि फिलहाल हो रहा है, चूंकि हिन्दु संयुत्तQ निर्वाचक-मण्डल पर बल दे रहे हैं, मुसलमान अलग निर्वाचक-मण्डल की मांग रख रहे हैं। अब यह हठ केवल मोल-तोल का विषय है। जैसा कि जिन्ना की 14 सूत्री मांगों ख्1, में तथा 30 दिसम्बर, 1927 को मुस्लिम लीग द्वारा पारित संकल्पों ख्2, में देखा जा सकता है। उनमें इस बात पर जोर दिया गया था कि जब सिंध को अलग करने और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त को गवर्नर शासित प्रान्त बना देने पर हिन्दू सहमति दे देते

  1. श्री जिन्ना के सूत्रों में सूत्र संख्या 15 देखें।

  2. संकल्प और इनके संबंध में श्री बरकत अली के भाषण के लिए इंडियन क्वार्टरली रजिस्टर, 1927,

खंड दो, पृ. 447-48 देखें।