270 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
है एक उत्तरदायी सरकार की स्थापना। 1937 तक उसने इस राजनीतिक सिद्धांत में कोई परिवर्तन नहीं किया, जब कि उसने अपने अहमदाबाद अधिवेशन में यह घोषणा की कि वह पूर्ण स्वराज में विश्वास रखती है, अर्थात् भारत के लिए संपूर्ण स्वतंत्रता में। मुस्लिम लीग ने 1912 में अपना यह राजनीतिक सिद्धांत सुनिश्चित किया कि भारत में उत्तरदायी सरकार की स्थापना हो। 1937 में उसने अपना लक्ष्य ‘उत्तरदायी सरकार’ से बदलकर ‘संपूर्ण आजादी’ कर लिया और इस तरह लीग भी कांगे्रस और हिंदू महासभा के समकक्ष आ गई।
तीनों राजनीतिक दलों द्वारा पारिभाषित स्वतंत्रता का तात्पर्य है ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति। परंतु ब्रिटिश साम्राज्य की दासता से मुक्ति पर सहमति ही पर्याप्त नहीं है। इस बात पर समझौता होना चाहिए कि भारत की स्वतंत्रता कैसे कायम रहे। इसके लिए यह सहमति आवश्यक है कि भारत न केवल ब्रिटिश साम्राज्य की दासता से मुक्त और स्वतंत्र होगा, वरन उसकी स्वतंत्रता और स्वधीनता को किसी भी विदेशी ताकत से सुरक्षित रखना होगा। वास्तव में स्वतंत्रता को कायम रखने की जिम्मेदारी ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति पाने से भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। परंतु इस अपेक्षित अहम दायित्व पर समान मतैक्य नहीं दिखाई देता। देखा जाए तो मुसलमानों का रवैया इस संबंध में आश्वस्त कर नहीं रहा है। अनेक मुस्लिम नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत की आजादी कायम रहे, इसे वे अपने दायित्व में शुमार नहीं करते। मैं ऐसे ही दो उदाहरण दे रहा हूं।
डॉ. किचलू ने 1925 में लाहौर में एक सभा में कहा थाः
फ्कांगे्रस उस समय तक निर्जीव थी जब तक खिलाफत कमेटी ने इसमें
जान नहीं फूँकी। जब खिलाफत कमेटी कांगे्रस में शामिल हुई, तो इसने
एक वर्ष में वह काम कर दिया जो हिंदू कांगे्रस 40 वर्ष में भी नहीं कर
सकी। कांगे्रस ने सात करोड़ अछूतों के उत्थान के लिए भी काम किया।
परंतु यह स्पष्टतः हिंदुओं के लिए ही था और भी इस पर कांगे्रस का ही
पैसा खर्च हुआ। मेरा और मेरे मुसलमान भाइयों का पैसा इस कार्य पर
पानी की तरह बहाया गया, परंतु बहादुर मुसलमानों ने इसे बुरा नहीं माना।
फिर जब हम मुसलमान तंज़ीम का काम करते हैं और इस पर पैसा खर्च
करते हैं जो न तो हिंदुओं का होता है और न कांगे्रस का, तो हिंदुओं को
इस पर आपत्ति क्यों होती है?
फ्यदि हम ब्रिटिश शासन को इस देश से उखाड़ फेंकते हैं और स्वराज
स्थापित करते हैं, और यदि अफगान या दूसरे मुस्लिम भारत पर आक्रमण