राष्ट्रीय कुंठा 271
करते हैं तो इस देश को विदेशी आक्रमण से बचाने के लिए हम मुसलमान
उनका मुकाबला करेंगे और अपने पुत्रों का बलिदान कर देंगे। परंतु एक
बात की मैं स्पष्ट घोषणा करूंगा। सुनो, मेरे हिंदू भाइयों, सुनो। ध्यान देकर
सुनो। यदि आप हमारे तंज़ीम आंदोलन के मार्ग में बाधा डालेंगे और हमें
हमारा अधिकार नहीं देगे, तो हम अफगानिस्तान या अन्य मुस्लिम शक्ति
के साथ हाथ मिलाएंगे और इस देश में अपना शासन स्थापित करेंगे।ऽ
मौलाना आजाद सुभानी ने 27 जनवरी, 1939 को सिलहट में जो अपने उद्गार व्यक्त किए, वे ध्यान देने योग्य हैं। एक मौलाना के सवाल के जवाब में मौलाना आज़ाद सुभानी ने कहाः
फ्यदि भारत में कोई प्रतिष्ठित नेता है, जो अंगे्रज को इस देश से बाहर
भगाने के पक्ष में है, तो वह मैं हूं। इसके बावजूद मैं चाहता हूं कि मुस्लिम
लीग की ओर से अंगे्रजों से कोई लड़ाई न हो। हमारी असली लड़ाई 22
करोड़ हिंदू दुश्मनों से है, जो बहुसंख्यक हैं। सिर्फ साढ़े चार करोड़ अंगे्रज
वास्तव में सारे विश्व को हड़पकर शक्तिशाली बन गए हैं। यदि ये 22
करोड़ हिंदू, जो शिक्षा, बुद्धि, धन और संख्या में समान रूप से आगे हैं,
शक्तिशाली बन गए तो ये सारे हिन्दू भारत को और यहां तक कि मिस्र,
तुर्की, काबुल, मक्का, मदीना और अन्य मुस्लिम राज्यों को याजुज-माजुज
की भांति एक के बाद एक को निगल जाएंगे। (कुरान में लिखा है कि
दुनिया के तबाह होने से पहले वे धरती पर पैदा होंगे और जो कुछ उन्हें
मिलेगा, उसका भक्षण कर लेंगे)।
अंगे्रज धीरे-धीरे कमजोर होते जा रहे हैं........और निकट भविष्य में वे
भारत से चले जाएंगे। अतः यदि हम इस्लाम के सबसे बड़े शत्रु हिंदुओं से
नहीं लड़ते और उन्हें कमजोर नहीं करते, तो वे न केवल भारत में रामराज्य
स्थापित करेंगे बल्कि क्रमशः सारे संसार में फैल जाएंगे। यह भारत के 9
करोड़ मुसलमानों पर निर्भर करता है कि हिन्दुओं को शक्तिशाली बनाना
है या कमजोर। अतः यह प्रत्येक धर्मपरायण मुस्लिम का परम कर्तव्य हो
जाता है कि वह मुस्लिम लीग में शामिल होकर युद्ध करे, जिससे कि यहां
हिंदु जम न सकें और अंगे्रजों के यहां से जाते ही मुसलमानों का शासन
स्थापित हो।
ऽ फ्थ्रू इंडियन आईज़य्, टाइम्स ऑफ इंडिया, 14 मार्च, 1925