274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
लोग उन लोगों का अनुसरण करेंगे, जो पैगम्बर के नाम पर आ“वान करते हैं, तो भारत की स्वतंत्रता के लिए तत्काल खतरा पैदा हो जाएगा। वे लोग अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, फारस, इराक, अरब, तुर्की और मिस्र एवं मध्य एशिया के उन कबीलों से मैत्री करके जो मुस्लिम हैं, भारत को मुस्लिम शासन के अधीन करने के लिए एकजुट हो जाएंगे और मुस्लिम शासन की स्थापना कर देंगे। हमने सोचा था कि भारतीय मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति वफादार होंगे, और वास्तव में हम अब भी सोचते हैं कि उनमें से शिक्षित वर्ग यह कोशिश करे कि मुसलमानों में ऐसी भावना फैले। परंतु ऐसे मुसलमान बहुत कम हैं और अक्षम भी हैं, इसलिए उन्हें धर्म-विरोधी की संज्ञा देकर उनकी हत्या कर दी जाएगी। मालाबार से हमें सीख मिल चुकी है कि इस्लामी शासन के अर्थ क्या हैं, और अब हम भारत में खिलाफत राज्य का दूसरा नमूना नहीं देखना चाहते हैं। मालाबार से बाहर रहने वाले मुसलमानों ने मोपलों के प्रति कितनी सहानुभूति बरती है, यह प्रमाणित हो चुका है। उनके बचाने के प्रयत्न में उनके सहधर्मियों ने और स्वयं श्री गांधी ने कहा कि उन मुसलमानों ने वही किया, जिसकी उनके धर्म ने उनको शिक्षा दी। मुझे इसकी सच्चाई में शंका है, परंतु सभ्य समाज में ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है जो यह मानते हैं कि उनका धर्म उन्हें हत्या करने, डाका डालने, आगजनी करने और उन लोगों को देश से निकालने की शिक्षा देता है, जो अपने धर्म को त्यागने से इंकार करते हैं। ठगों का विश्वास था कि उनका देवता उन्हें लोगों का, विशेषकर पैसे वाले यात्रियों का, गला घोंटने की इजाजत देता है। ऐसे दैवी कानूनों को सभ्य समाज के कानूनों को दरकिनार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और जो लोग बीसवीं सदी में रह रहे हैं, वे या तो मध्ययुगीन विचार के लोगों को शिक्षित करें या उन्हें निर्वासित कर दें। ऐसे लोगों का स्थान उन्हीं देशों में है जो उनके विचारों से सहमत हैं और जहां अब भी ऐसे तर्क वे उन्हें दे सकते हैं जो उनसे सहमत नहीं होते, जैसे बहुत पहले फारस और पारसी लोग, और हमारे समय में ‘बहाई’। वास्तव में विभिन्न मुस्लिम मतावलंबी कट्टरपंथी मुस्लिम शासन में सुरक्षित नहीं हैं। भारत में ब्रिटिश शासन ने सभी मतावलम्बियों की स्वतंत्रता की सुरक्षा की है। शिया, सुन्नी, सूफी, बहाई सब मुस्लिम जातियां भारत में सुरक्षापूर्वक रहती हैं, यद्यपि ब्रिटिश शासन उन्हें सामाजिक बहिष्कार से वहां नहीं रोक सकता, जहां वे अल्पसंख्यक हैं। मुस्लिम शासित देशों की तुलना में मुसलमान ब्रिटिश शासन में ज्यादा स्वतंत्र हैं। स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के