276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
बंगला समाचार पत्र के संपादक ने 1924 में कवि डॉ. रवींद्रनाथ टैगोर का साक्षात्कार लिया। इस साक्षात्कार की एक रपट में कहा गया हैः
फ्..................दूसरा महत्वपूर्ण कारण, कवि के अनुसार, जो हिंदू-मुस्लिम
एकता को असंभव बना रहा था, वह था मुसलमानों की देशभक्ति, जो वे
किसी एक देश के प्रति कायम नहीं रख सकते। कवि ने कहा कि उन्होंने
कई मुसलमानों से निःसंकोच होकर पूछा कि यदि भारत पर कोई मुसलमान
ताकत आक्रमण करती है तो क्या वे अपने हिंदू पड़ोसी के साथ मिलकर
अपने देश की रक्षा करेंगे? कवि को जो उत्तर मिले, उससे उन्हें संतोष नहीं
हुआ। उन्होंने कहा कि वे निश्चित रूप से कह सकते हैं कि श्री मोहम्मद
अली जैसे व्यक्ति का यह कथन है कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी
मुस्लिम किसी भी देश में रहता हो, इस्लाम धर्मावलंबी के विरुद्ध उसका
खड़ा होना असंभव है।य्ऽ
II
यदि स्वतंत्रता असंभव हो, तो शत-प्रतिशत भारतीय का दूसरा लक्ष्य होगा भारत को ब्रिटिश साम्राज्य में प्रभुत्वपूर्ण दर्जा (डोमिनियन स्टेटस) मिले। ऐसे लक्ष्य से कौन संतुष्ट होगा? मेरी यह दृढ़ धारणा है कि यदि मुसलमानों पर छोड़ दिया जाए, तो वे डोमिनियन स्टेटस से संतुष्ट नहीं होंगे, जब कि हिंदू निश्चित रूप से संतुष्ट हो जाएंगे। ऐसा वक्तव्य भारतीयों और अंगे्रजों के कानों को जरूर कर्कश लगेगा। कांगे्रस के स्वतंत्रता पर जोर देने के कारण यह धारणा बनी है कि हिंदू स्वतंत्रता चाहते हैं, मुस्लिम उपनिवेश का दर्जा। जो गोलमेज सम्मेलन में उपस्थित थे, वे यह जरूर समझ गए होंगे कि इस बात की कितनी गहरी छाप अंगे्रजों पर पड़ी और कांगे्रस की दो मांगों, अर्थात् स्वतंत्रता और ऋण के निराकरण, से हिंदुओं के हितों और दावों को कितना नुकसान हुआ। इन मांगों को देखते हुए अंगे्रजों को लगा कि हिंदू उनके दुश्मन हैं और मुसलमान, जिन्होंने न तो स्वतंत्रता मांगी और न ही ऋण का निराकरण मांगा, उनके मित्र हैं। यह धारणा चाहे कितनी भी सत्य क्यों न हो, कांगे्रस के दृढ़ इरादों के परिपे्रक्ष्य में एक झूठी धारणा है, जो मिथ्या प्रचार से बनाई गई है_ चूंकि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हिंदू हृदय से प्रभुत्वपूर्ण उपनिवेश का दर्जा चाहते हैं और मुस्लिम स्वतंत्रता। यदि इस बात का प्रमाण चाहिए, तो काफी प्रमाण हैं।
स्वतंत्रता की बात सर्वप्रथम 1921 में उठाई गई थी। उस वर्ष भारतीय राष्ट्रीय कांगे्रस, अखिल भारतीय खिलाफत कांफे्रंस और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने
ऽ ‘थ्रू इंडियन आईज़’, टाइम्स ऑफ इंडिया, 18 अपै्रल, 1924