280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
फ्27 दिसंबर, 1921 को जब दूसरे दिन कांफ्रेंस की बैठक शुरू
हुई, तो स्वतंत्रता के प्रस्ताव पर मतभेद नजर आया। जब श्री हसरत मोहानी
ने पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति और ब्रिटिश साम्राज्य के अंत के लक्ष्य वाले अपने
प्रस्ताव को प्रस्तुत किया तो विषय-समिति के एक सदस्य द्वारा इस आधार
पर आपत्ति उठाई गई कि उनके संविधान के अनुसार किसी भी प्रस्ताव
को, जो उनके सिद्धांत में परिवर्तन चाहता है, तब तक पारित नहीं किया
जा सकता, जब तक विषय-समिति में उसे दो-तिहाई का बहुमत प्राप्त न
हुआ हो।
फ्अध्यक्ष हकीम अजमल खां ने आपत्ति को उचित ठहराया और
स्वतंत्रता के प्रस्ताव को अनियमित घोषित कर दिया। श्री हसरत मोहानी ने
इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि अध्यक्ष ने उसी सदस्य की वही
आपत्ति विषय समिति में अस्वीकार कर दी थी, जब कि उसे खुले अधिवेशन
में स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने युक्तिकौशल से
उनका प्रस्ताव इसलिए नामंजूर किया, ताकि कांफ्रेंस में वह उनकी यह
घोषणा करने में अवरोध खड़ा कर सकें कि स्वराज से उनका प्रयोजन है
पूर्ण स्वतंत्रता।ऽ
अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मौलाना हसरत मोहानी थे। प्रस्ताव से संबंधित लीग की कार्यवाही रिपोर्ट कहती हैः
फ्मुस्लिम लीग की बैठक 31 दिसंबर, 1921 को रात्रि 9 बजे शुरू हुई।
कुछ निर्विवाद प्रस्ताव पारित करने के बाद अध्यक्ष हसरत मोहानी ने करतल
ध्वनि के बीच घोषणा की कि वे प्रस्ताव करते हैं कि विषय समिति का
वह निर्णय, जिसमें उनके स्वराज-प्राप्ति और ब्रिटिश साम्राज्य के अंत से
संबंधित प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया गया है, लीग का अंतिम तथा
बहुमत विचार मानते हुए यह बात स्वीकार कर ली जायेगी, परंतु प्रस्ताव
के विषय की महत्ता को देखते हुए वह प्रस्ताव पर बिना मतदान के चर्चा
की अनुमति देंगे। श्री आजाद सुभानी ने, जिन्होंने विषय समिति में प्रस्ताव
प्रस्तुत किया था, लीग में भी उसे प्रस्तावित किया। उन्होंने कहा कि वे
हिंदू-मुस्लिम एकता को अति आवश्यक समझते हैं और इस युद्ध को लड़ने
का अहिंसा व असहयोग ही अकेला रास्ता है और श्री गांधी पूर्ण रूप से
ऽ इंडियन एनुअल रजिस्टर, 1922, अनुबंध पृ. 133-134