12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 296

राष्ट्रीय कुंठा

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जवाब पत्थर से देने के उद्देश्य ख्1, से था। और यदि श्री गांधी और पंडित मोतीलाल नेहरू इस पर मौन रहे तो इसका मुख्य कारण यह था कि भारतीयों के विरुद्ध लॉर्ड बर्केन्हेड द्वारा प्रयुक्त असंयमपूर्ण भाषा ने जिस तूफान को खड़ा किया था वह इतना भयानक था कि उन्होंने झुक जाना ही श्रेयस्कर समझा बनिस्बत इसके कि इसे पूरी तरह से समाप्त करने में जुट जाना जो कि अन्यथा वे अत्यन्त सरलता से कर लेते। परंतु यह प्रस्ताव कांगे्रस में हिन्दुओं की वास्तविक मनःस्थिति का द्योतक नहीं था। अन्यथा, यह स्पष्ट करना संभव नहीं है कि कैसे नेहरू समिति ने स्वयं तैयार की गई संवैधानिक संरचना के आधार के रूप में डोमिनियन स्टेटस की स्थिति को स्वीकार करके 1927 के मद्रास संकल्प का उल्लंघन किया। यह स्पष्ट करना संभव नहीं कि कैसे कांगे्रस ने 1928 में डोमीनियन स्टेटस की स्थिति को स्वीकार कर लिया यदि वास्तव ख्2, में इसने 1927 में स्वराज को स्वीकार कर लिया था, जैसा कि इस संकल्प में कहा गया है। संकल्प का यह खंड कि कांगे्रस डोमीनियन स्टेटस की स्थिति को तभी स्वीकार करेगी जब यह 31 दिसम्बर, 1929 से पहले दिया जाए, अन्यथा इसकी मांग बदलकर स्वराज्य की हो जाएगी, वस्तुतः स्वयं को कलक से बचाने का ही उपाय था न कि उनकी सोच में वास्तविक परिवर्तन का द्योतक, क्योंकि देश की राजनीतिक नियति जैसे महत्वपूर्ण सवाल के विषय में समय और काल कभी भी सबसे महत्वपूर्ण नहीं हो सकता।

1927 के संकल्प के बावजूद भी कांगे्रस डोमिनियन स्टेटस की स्थिति में विश्वास करती रही तथा स्वराज्य में इसका विश्वास नहीं था। यह कांगे्रस के निर्विवाद नेता श्री गांधी द्वारा समय-समय पर की गई घोषणाओं से बिल्कुल स्पष्ट है। इस विषय पर 1929 से आगे श्री गांधी की घोषणाओं का अध्ययन करने वाला कोई भी व्यक्ति यह महसूस किए बिना नहीं रह सकता कि श्री गांधी स्वराज्य संबंधी संकल्प से कभी भी प्रसन्न नहीं थे तथा वह सदैव यह जरूरी समझते रहे कि कांगे्रस को पुनः डोमीनियन स्टेटस की स्थिति की मांग की ओर वापस लाया जाए। उन्होंने शालीनता से व्याख्या करनी शुरू की। कांगे्रस के लक्ष्य को स्वतंत्रता से घटाकर स्वतंत्रता के सार तक कर दिया। स्वतंत्रता के सार से इन्होंने इसे समान भागीदारी में और समान भागीदारी से उसे वापस उस मूल स्थान पर लाकर रोक दिया। यह घटनाचक्र तब पूरा

  1. श्री सम्बामूर्ति ने संकल्प का समर्थन करते हुए कहाः ‘यह संकल्प लॉर्ड बर्केन्हेड द्वारा दी गई अहंकारपूण्

ार् चुनौती का एक मात्र जवाब है।य्-द इंडियन क्वार्टरली रजिस्टर, 1927, खण्ड दो, पृ. 238 2. पंडित जवाहरलान नेहरू ने संकल्प का प्रस्ताव करते हुए कहा था - फ्कांगे्रस यह घोषणा करती है कि

आज से इसका लक्ष्य पूर्ण स्वराज्य है। तथापि कांगे्रस का द्वार उनके लिए भी खुला है जो इससे कम

पर भी संतुष्ट है।य्- वही, पृ. 238