12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 298

राष्ट्रीय कुंठा

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पल विरोध किया गया और भाषण के दौरान उन्हें लगातार टोका गया।

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फ्नेहरू रिपोर्ट ने अपनी प्रस्तावना के रूप में गुलामी के बंधन को

स्वीकार कर लिया था............. स्वतंत्रता और डोमीनियन स्टेटस अत्यंत

भिन्न बातें थीं....................

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मैं आपसे पूछता हूं, जब आप अपने राष्ट्रवाद पर अभिमान करते हैं

और संप्रदायवाद की भर्त्सना करते हैं, (तो) मुझे दुनिया में अपने राष्ट्रवादी

भारत के समान देश बताइए।

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फ्आप झूठे सिद्धांतों, अनैतिक धारणाओं और गलत विचारों से अपने

संविधान में प्रतिदिन समझौता करते हैं, परंतु हमारे सांप्रदायिक लोगों, पृथक

निर्वाचन-मंडल और आरक्षित स्थान से कोई समझौता नहीं करते। हम

जनसंख्या का 25 प्रतिशत हैं और फिर भी आप विधान सभा में हमें 33

प्रतिशत स्थान नहीं देते। आप यहूदी हैं, बनिया हैं, लेकिन अंगे्रज को आप

अपने शासन में विशेष दर्जा देंगे।य्ऽ

कांफ्रेंस ने निम्नलिखित सारगर्भित संक्षिप्त प्रस्ताव पारित कियाः

फ्यह कांफ्रेंस पुनः घोषणा करती है कि पूर्ण स्वतंत्रता ही हमारा लक्ष्य है।य् मौलाना हसरत मोहानी ने 1931 में इलाहाबाद में हुए जमाते-उल-उलेमा के सम्मेलन में अपने अध्यक्षीय भाषण में नेहरू रिपोर्ट की नपे-तुले पर नरम शब्दों में भर्त्सना करने के वही कारण बताए। मौलाना ने कहाः

फ्भारत के संबंध में मेरा राजनीतिक मत सर्वविदित है। मैं पूर्ण स्वतंत्रता

से कम कुछ भी नहीं चाहता और वह भी संयुत्तQ राज्य अमरीका

या सोवियत संघ के अनुरूप, जो निश्चित रूप से (1) प्रजातांत्रिक,

(2) संघीय और (3) अपकेंद्रीय हों, और जिसमें अल्पसंख्यक मुस्लिम

समुदाय के अधिकार सुरक्षित हों।

फ्कुछ समय तक दिल्ली की जमाते-उल-उलेमा पूर्ण स्वतंत्रता के

विचार पर अडिग रही, और मुख्यतः इसी कारण उसने नेहरू रिपोर्ट को

ऽ इंडियन क्वार्टरली रजिस्टर, 1928, भाग 2 पृ. 402-403