294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
फ्हमारी सारी राजनीतिक व्यवस्था पहले से ही यह मानती है कि हमारे
तमाम लोग मूलतः एक ही हैं।य्
लास्की ने बेलफोर की इन टिप्पणियों पर सरकार के सफलतापूर्वक संचालन के लिए अपेक्षित तत्वों के संदर्भ में बहुत ही अच्छे और संक्षिप्त तरीके से टिप्पणी की हैः
फ्संसदीय सरकार की शक्ति उसके मौलिक उद्देश्यों पर उसकी राजनीतिक
पार्टियों की एकता से मापी जाती है।य्ऽ
प्रतिनिधि सरकार के सही संचालन के लिए आवश्यक तत्वों का उल्लेख करने के बाद यह परीक्षण किया जाना समीचीन होगा कि क्या ये बातें भारत में भी विद्यमान हैं।
हम यह कहां तक कह सकते हैं कि हिंदू और मुसलमान प्रतिनिधि सरकार को कार्य करने देने की इच्छा रखते हैं? प्रतिनिधि और उत्तरदायी सरकार को बेकार और अव्यावहारिक साबित करने के लिए यही काफी है कि दो पार्टियों में से एक सरकारी तंत्र को अवरुद्ध करने का मन बना ले और यदि इस तरह की मंशा स्पष्ट हो तो फिर यह जानने की भी जरूरत नहीं है कि हिंदुओं और मुसलमानों के दिमाग में क्या विचार है? हिंदुओं की अपेक्षा मुसलमान अधिक मुखर होते हैं_ इसलिए उनके मन की बात आसानी से जानी जा सकती है, जबकि हिंदुओं के मन की बात जानना आसान नहीं है। मुसलमानों का दिमाग कैसे काम करेगा, और कौन सी बातें उनके दिमाग को प्रभावित करेंगी, यह इस्लाम के मौलिक सिद्धांतों को लेकर व्यक्त किए गए उन विचारों से स्पष्ट हो जाएगा, जो मुस्लिम राजनीति पर प्रभावी हैं और भारत सरकार के प्रति मुस्लिम-प्रवृत्ति के बारे में कुछ प्रमुख मुस्लिमों ने सामने रखे हैं। इनमें से इस्लाम के कुछ धार्मिक सिद्धांत और मुस्लिम नेताओं के विचार नीचे उद्धृत हैं, ताकि समस्याओं पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जा सके और यह निर्णय लिया जा सके कि बेलफोर द्वारा कही गई बातें भारत में अपना वजूद रखती हैं या नहीं?
इस्लाम के सिद्धांतों में एक सिद्धांत उल्लेखनीय है, जो कहता है कि उस देश में जो मुस्लिम शासन में नहीं है जब भी कभी मुसलमानों के कानून और उस देश के विद्यमान कानून के बीच विवाद उत्पन्न हो, तो इस्लामिक कानून को उस देश के कानून के ऊपर माना जाए। मुसलमानों के लिए मुस्लिम कानून का अनुपालन और उस देश के कानून की अवहेलना उचित माना जाएगा।
ऽ इंग्लैंड में संसदीय सरकार, पृ. 37