राष्ट्रीय कुंठा
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सरकार तो सत्ता के प्रति आज्ञापरायणता पर आधारित होती है। परंतु वे, जो हिंदुओं और मुसलमानों का स्वशासन स्थापित करने के लिए व्यग्र हैं, शायद यह जांच करना नहीं छोड़ेंगे कि आज्ञापरायणता किस बात पर निर्भर करती है और यह सामान्य तथा आपात्काल में कैसे प्राप्त की जा सकती है। यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। चूंकि, यदि आज्ञापरायणता असफल रहती है, स्वायत्तशासन का अभिप्राय है मिलकर काम करना, न कि (किसी के) तहत काम करना। आदर्श परिपे्रक्ष्य में ऐसा हो सकता है। परंतु व्यावहारिक व सामान्य जगत में यदि प्रतिनिधि सरकार में प्रतिनिधित्व आनुपातिक नहीं है, तो अल्पंसख्यक को बहुसंख्यक के अधीन काम करना होगा, और वह बहुसंख्यक के अधीन काम करता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बहुसंख्यक वर्ग द्वारा स्थापित सरकार की प्रभुत्वपूर्ण आज्ञा का पालन कहां तक होता है।
यह कारक स्वायत्तशासन की सफलता के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि जब बेलफोर ने इसकी सफलता को मूलतः पार्टियों की एकता पर निर्भर बताया, तो कहा जा सकता है कि वह सत्य का कुछ अंश ही कह रहे थे। वे इस बात का उल्लेख करने में असफल रहे कि सरकारी आज्ञा का पालन करने की इच्छा किसी भी स्वायत्तशासन योजना की सफलता के लिए समान रूप से आवश्यक है।
संसदीय सरकार के सफलतापूर्वक संचालन के लिए आवश्यक इस दूसरी शर्त की चर्चा जेम्स ब्राइस ने की है।ऽ राजनीतिक साहचर्य के आधार का विवेचन करते हुए ब्राइस बताते हैं कि राज्यों के निर्माण में चाहे बल का योगदान हो, फिर भी वह अनेक तत्वों में से एक है और सबसे महत्वपूर्ण नहीं है। राजनीतिक समुदायों की रचना करने में उन्हें आपस में ढालने, विस्तार करने और एकसूत्र में बांधने के लिए जो चीज ज्यादा महत्वपूर्ण है, वह है आज्ञापरायणता। किसी सरकार की वैधता का स्वेच्छा से आज्ञापालन और अनुपालन नागरिकों और समूहों के मनोवैज्ञानिक स्वभाव पर निर्भर करता है। ब्राइस के अनुसार, जो प्रवृत्तियां आज्ञाकारिता उत्पन्न करती हैं, वे हैं- आलस्य, विनय, सहानुभूति, भय और विवेक। इनमें सभी समान महत्व की नहीं हैं। वास्तव में ये अपने महत्व के अनुसार सापेक्ष हैं, जिससे आज्ञापालन की अभिरुचि उत्पन्न होती है, जैसा कि ब्राइस ने निरूपित किया है। कुल मिलाकर आज्ञाकारिता में भय और विवेक का प्रतिशत आलस्य से कम, और विनय तथा सहानुभूति से और भी कम है। इस विचार के अनुसार विनय और सहानुभूति में दो महत्वपूर्ण तत्व हैं जो लोगों की अपनी सरकार की सत्ता का अनुपालन करने के लिए अभिपे्ररित करते हैं।
ऽ स्टडीज़ इन हिस्टरी एंड जुरिसप्रुडेंस, भाग 2, निबंध-1