306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
एक वर्ष बाद अलीगढ़ और अजमेर में बोलते हुए मुहम्मद अली ने कहाः
फ्श्री गांधी का चरित्र कितना भी पवित्र क्यों न हो, धार्मिक दृष्टिकोण से
वह मुझे किसी भी मुसलमान से, चाहे वह मुसलमान चरित्रहीन ही हो,
निकृष्ट ही लगेंगे।य्
इस वक्तव्य से हलचल और उत्तेजना फैल गई। अनेक लोगों को तो विश्वास ही नहीं हुआ कि श्री मुहम्मद अली, श्री गांधी के प्रति, जो उन्हें इतना आदर देते हैं, ऐसी कठोर और घृणास्पद भावना रखेंगे। जब श्री मुहम्मद अली लखनऊ के अमीनाबाद पार्क की सभा में बोल रहे थे, तब उनसे पूछा गया कि क्या उनके द्वारा दिया गया उक्त कथन सत्य है, तो उन्होंने बिना किसी झिझक या पश्चाताप के कहाः
फ्हां, अपने धर्म और मत के अनुसार, मैं एक व्याभिचारी और गिरे हुए
मुसलमान को भी श्री गांधी से श्रेष्ठ मानता हूं।य् ख्1,
उस समय श्री मुहम्मद अली को अपना वह बयान वापस लेने का सुझाव दिया गया ख्2,, जिसमें उन्होंने श्री गांधी को जो एक काफिर थे, ईसा के समान आदरणीय बताया था और जिसने मुस्लिम समुदाय को चोट पहुंचाई थी क्योंकि मुस्लिम धर्मानुसार एक काफिर की ऐसा प्रशंसा वर्जित थी।
हिंदू-मुस्लिम संबंधों के बारे में 1928 में जारी एक घोषणापत्र ख्3, में ख्वाजा हसन निजामी ने घोषणा कीः
फ्मुसलमान हिंदुओं से भिन्न हैं। वे हिंदुओं से घुलमिल नहीं सकते, क्योंकि
रक्तरंजित युद्धों के बाद मुसलमानों ने भारत पर फतह हासिल की थी और
अंगे्रजों ने भारत उन्हीं (मुसलमानों) से लिया था। मुसलमान एक कौम है
और वही भारत के अकेले बादशाह हैं। वे कभी भी अपना व्यक्तित्व और
पहचान नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने हिंदुओं पर सैकड़ों वर्षों तक शासन किया
और इसीलिए उनका इस देश पर अक्षुण्ण अधिकार है। हिंदू संसार में एक
अल्पसंख्यक समुदाय हैं। उन्हें आपसी लड़ाइयों से ही फुरसत नहीं है। वे
गांधी में विश्वास करते हैं और गाय की पूजा करते हैं। वे दूसरे आदमियों
के यहां पानी पीकर अपवित्र हो जाते हैं। हिंदू स्वायत्तशासन की न तो
इच्छा-शक्ति ही रखते और न ही उनके पास इसके लिए समय ही है।
उन्हें आपसी लड़ाइयां ही लड़ने दें। दूसरे लोगों पर शासन करने की उनकी
वही, 21-3-1924
वही, 26-4-1924
वही, 14-3-1978