12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 318

राष्ट्रीय कुंठा

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उनके आलोचक यह भूल जाते हैं कि इसकी सहमति न देना भी बुद्धिमत्ता नहीं थी, जैसा कि श्री मुहम्मद अली ने ठीक ही कहा हैः

फ्यह भले ही विरोधाभास लगे, पर पृथक निर्वाचन की व्यवस्था हिंदू-मुस्लिम

एकता की शुरूआत में तेजी ला रही थी। पहली बार सही अर्थों में

भारतवासियों को मतदान का अधिकार दिया जा रहा था, चाहे वह कितना

भी सीमित हो, और यदि हिंदू और मुसलमान उतने ही विभाजित रहते, जितना

कि अंगे्रजों के शासन के शुरू में थे और अक्सर एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी

भी रहे, तो मिश्रित निर्वाचन सांप्रदायिक संघर्ष के लिए अच्छा-खासा अखाड़ा

बन जाता, और इससे दोनों समुदायों के बीच की खाई और चौड़ी हो जाती।

परंतु चुनाव में प्रत्याशी अपने सम्प्रदाय के मतदाताओं से यह अपील करता

कि वह प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के संप्रदाय के प्रति दुर्भावना रखता है, यद्यपि

वह इस भावना को परोक्षतः पेश करता कि वह अपने संप्रदाय के हित

में ही सब कर रहा है। यह तो बुरा होता ही, परंतु दो असमान समुदायों

द्वारा किए गए मतदान के फलस्वरूप उक्त निर्वाचन का नतीजा और भी

अधिक बुरा होता, क्योंकि जो समुदाय चुनाव में सफल नहीं होगा, वह

दूसरे समुदाय के सफल प्रत्याशी के प्रति और भी दुर्भावना रखेगा। दोनों

समुदाय जिस तरह से विभाजित हैं, उसको देखते हुए चुनाव में किसी भी

राजनीतिक सिद्धांत के विशिष्ट स्थान प्राप्त करने की कोई गुंजाइश नहीं

थी। पृथक निर्वाचन से सांप्रदायिक लड़ाइयों को रोकने में सहायता मिली,

हालांकि मैं इस बात से अनभिज्ञ नहीं हूं कि जब सांप्रदायिक ईर्ष्या चरम

सीमा पर हो तो वे ही व्यक्ति चुनकर आएंगे जो दूसरे संप्रदाय के प्रति

द्वेष के लिए जाने जाते हैं।य्

परंतु 1909 में हिंदुओं द्वारा निर्वाचन के पक्ष में दी गई रियायतों के फलस्वरूप हिंदू-मुसलमान एकता बन नहीं पाई। इसके बाद 1916 में लखनऊ पैक्ट आया, जिसके तहत हिंदुओं ने मुसलमानों को हर तरह संतुष्ट किया। फिर भी इससे दोनों के बीच कोई सुलह नहीं हो सकी। छह साल बाद हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता लाने के लिए एक और प्रयास किया गया। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने मार्च 1923 में हुए वार्षिक सम्मेलन में एक संकल्पऽ पारित किया, जिसमें एक राष्ट्रीय समझौता करने का अनुरोध किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विभिन्न भारतीय समुदायों और धार्मिक अनुयायियों के बीच सांप्रदायिक एकता और सौहार्द कायम हो, और एक कमेटी का भी गठन किया गया, ताकि वह अन्य संगठनों द्वारा

ऽ पूरे संकल्प के लिए कृपया इंडियन एनुअल रजिस्टर 1923 भाग-1, पृ. 395-96 देखें।