राष्ट्रीय कुंठा
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करना जिनसे सभी दल कांगे्रस में सम्मिलित हो सकें। (ख) एक ऐसी योजना बनाना जिससे स्वराज के तहत सभी समुदायों, जातियों और उप-जातियों का संविधान सभाओं तथा अन्य निर्वाचित संस्थाओं में प्रतिनिधित्व हो तथा ऐसी सिफारिशें करना, जिससे सेवाओं में कार्यक्षमता को प्रभावित किए बिना सभी समुदायों का सही और उचित प्रतिनिधित्व हो, और (ग) स्वराज की एक ऐसी योजना तैयार करना जो देश की वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। समिति को निर्देश दिया गया कि वह 15 फरवरी या उससे पूर्व अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। कार्य के शीघ्र निष्पादन के लिए कुछ सदस्यों ने स्वराज की योजना बनाने के लिए एक उप-समिति बनाई, और सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की योजना बनाने का काम मुख्य समिति के लिए छोड़ दिया गया।
श्रीमती बेंसेंट की अध्यक्षता में स्वराज उप-समिति, संविधान पर रिपोर्ट तैयार करने में सफल हुई और इसने अपनी रिपोर्ट सर्वदलीय कांफ्रेंस (ऑल पार्टी कांफे्रंस) की सामान्य समिति को प्रस्तुत की। परंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की योजना बनाने के लिए गठित समिति की बैठक मार्च में दिल्ली में आयोजित हुई, और बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई। यह इसलिए हुआ कि लाला लाजपतराय और हिंदुओं के अन्य प्रतिनिधियों ने उप-समिति में भाग नहीं लिया। श्री गांधी और पं. मोतीलाल नेहरू ने निम्नलिखित वक्तव्य जारी कियाः
फ्लाला लाजपत राय ने बैठक स्थगित करने के लिए कहा था, क्योंकि
उस समय सर्वश्री जयकर, श्रीनिवास आयंगर और जयराम दास बैठक में
भाग लेने में असमर्थ थे। हम अपनी ही जिम्मेदारी पर बैठक को किसी
और दिन के लिए स्थगित करने में असमर्थ थे। अतः हमने लाला लाजपत
राय को सूचित किया कि बैठक स्थगित करने के सवाल को समिति के
सामने रखा जाए। फलस्वरूप ऐसा ही किया गया, परंतु किसी निर्णय पर
पहुंचने के लिए लाला लाजपत राय की अनुपस्थिति तथा उनके द्वारा नामित
व्यक्तियों के अलावा उपस्थिति बहुत कम थी। हमारे मत में निकट भविष्य
में किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने की कोई आशा नहीं है।’’ऽ
निःसंदेह यह वक्तव्य संबंधित पक्षों की मनःस्थिति को भली प्रकार दर्शाता है। समिति में हिंदुओं के प्रवक्ता स्वर्गीय लाला लाजपत राय ने इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाले पत्र ‘लीडर’ में एक लेख में कहा था कि नया समझौता करने की कोई जल्दी
ऽ समिति की कार्यवाही के विवरण के लिए देखें - इंडियन क्वार्टरली रजिस्टर, 1925, भाग-ृ, पृ. 66-77