312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
नही है और यह मानने से इंकार कर दिया कि हिंदुओं के बहुमत वाले कुछ सूबे और मुसलमानों के बहुमत वाले अन्य कुछ सूबे हिंदू-मुस्लिम एकता का एक तरीका है।
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रश्न 1927 में फिर उठाया गया। यह प्रयास साइमन कमीशन जांच के कुछ पहले इस आशा के साथ किया गया था कि जिस तरह 1916 में मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड जांच से पहले इस तरह का प्रयास करके लखनऊ समझौते को सफल बनाया गया था, उसी तरह यह प्रयास भी फलीभूत हो जाएगा। आरंभ में कुछ जाने-माने मुस्लिम नेताओं की बैठक 20 मार्च, 1927 को दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें मुस्लिम हितों की सुरक्षा के लिए कुछ प्रस्तावों ख्1, पर विचार किया गया। इस बैठक में पारित इन प्रस्तावों पर, जिन्हें दिल्ली-प्रस्ताव के नाम से जाना गया, कांगे्रस ने दिसंबर 1927 में अपने मद्रास-अधिवेशन में विचार किया। इसी समय कांगे्रस ने एक संकल्प ख्2, पारित करके अपनी कार्यकारिणी समिति को इसी तरह के अन्य संगठनों द्वारा गठित समितियों से विचार-विमर्श करने का अधिकार दिया, ताकि भारत के लिए स्वराज्य का संविधान प्रारूप तैयार किया जा सके। लिबरल फेडरेशन और मुस्लिम लीग ने इसी तरह के संकल्प पारित करके अपने प्रतिनिधियों को इस तरह की वार्ता में शामिल होने के लिए नियुक्त किया। कांगे्रस कार्यकारिणी समिति ने अन्य संगठनों को भी अपने प्रतिनिधि प्रवक्ता भेजने को कहा। 12 फरवरी, 1928 को उक्त संविधान ख्3, सम्मेलन की एक उप-समिति गठित की गई। समिति ने संविधान के मसौदे सहित एक रिपोर्ट तैयार की, जिसे नेहरू रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। यह रिपोर्ट कांगे्रस अधिवेशन के पूर्व 22 दिसंबर, 1928 को कलकत्ता में डॉ. अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन के सामने विचारार्थ रखी गई। 1 जनवरी, 1929 को, यह बैठक फिर अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।
यह वास्तव में आश्चर्यजनक है, क्योंकि मुसलमानों के प्रस्तावों में और नेहरू-कमेटी की रिपोर्ट में कोई विशेष विरोधाभास नहीं थे। यह बात श्री जिन्ना के भाषण से, जो उन्होंने सर्वदलीय बैठक में नेहरू समिति की रिपोर्ट में चार संशोधनों की मांग करते हुए दिया था, स्पष्ट होती है। मुसलमानों के लिए केंद्रीय विधान मंडल में 33ख्1/3, प्रतिशत प्रतिनिधित्व की मांग के संबंध में अपने प्रथम संशोधन पर बोलते हुए
- इन प्रस्तावों का विवरण इंडियन क्वार्टरली रजिस्टर, 1927, भाग-1, पृ. 33 में उपलब्ध है। यही प्रस्ताव
बाद में श्री जिन्ना के 14 सूत्री कार्यक्रम का आधार बना।
- इन प्रस्तावों पर कांगे्रस के संकल्प के लिए देखें इंडियन क्वार्टरली रजिस्टर, 1927, खंड-2, पृ. 397-98
- सर्वदलीय सम्मेलन के जन्म, पृष्ठभूमि, गठन तथा विषय के लिए देखें, वही, 1928, खंड-1, पृ. 1 से
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