12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 322

राष्ट्रीय कुंठा

श्री जिन्ना ने कहाः

313

फ्नेहरू-रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी स्कीम के मुताबिक, मुसलमानों को केंद्रीय विधानमंडल में एक तिहाई या उससे अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा, और यह भी दलील दी जा रही है कि उन्हें पंजाब और बंगाल में उनकी जनसंख्या के अनुपात से और भी ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा। जो हम सोचते हैं, वह यह है। यदि मुसलमानों को एक-तिहाई बहुमत मिलता है तो जो तरीका आप अपना रहे हैं, वह उन सूबों के लिए न्यायसगत नहीं है, जहां मुसलमान अल्पसंख्यक हैं, क्योंकि (ऐसी स्थिति में) केंद्रीय विधान मंडल में पंजाब और बंगाल से उनका प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात से ज्यादा होगा। आप अमीरों को ज्यादा दे रहे हैं और गरीबों को सिर्फ उनकी जनसंख्या के अनुपात में। यह ठोस तर्क हो सकता है, परंतु बुद्धिमत्ता नहीं.........

फ्अतः जैसा कि नेहरू रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है, यदि मुसलमानों को एक-तिहाई या उससे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलता है तो पंजाब और बंगाल को ज्यादा प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता। इसलिए 6 या 7 अतिरिक्त सीटें उन सूबों में बांटी जा सकती हैं जहां मुसलमान बहुत कम संख्या में हैं, जैसे कि मद्रास और बम्बई सूबे में तो 8 प्रतिशत मुसलमान ही रह जाएंगे। और भी सूबे हैं जहां हम अल्पसंख्यक हैं। इसी कारण हम कहते हैं कि एक-तिहाई आरक्षण कर दीजिए और हम अपने ही समायोजन से उन सीटों को मुसलमानों में बांट देंगे।य्

उनका दूसरा संशोधन जनसंख्या के आधार पर पंजाब और बंगाल के आरक्षण से संबंधित था, अर्थात् सांविधिक बहुसंख्यक का दावा। इस पर श्री जिन्ना ने कहाः

फ्आपको याद होगा कि मूल रूप से ये प्रस्ताव कुछ मुस्लिम नेताओं की ओर से मार्च 1927 में आए थे, जिन्हें दिल्ली प्रस्ताव के नाम से जाना जाता है। इन प्रस्तावों पर अखिल भारतीय कांगे्रस कमेटी ने बम्बई और मद्रास में तथा मुस्लिम लीग ने पिछले वर्ष कलकत्ता में विचार करके काफी हद तक सहमति व्यक्त की थी। मैं विस्तृत तर्कों में नहीं जाऊंगा। सारांश यह है कि पंजाब और बंगाल में मुसलमानों की मतदान करने की शक्ति जनसंख्या के अनुपात में नहीं है, हालांकि वे वहां बहुमत में हैं।