राष्ट्रीय कुंठा
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वर्ष 1919 में श्री जिन्ना ने भारत सरकार के संशोधन विधेयक पर प्रवर समिति के समक्ष अपना साक्ष्य दिया। हिंदू-मुस्लिम एकता पर समिति के सदस्यों द्वारा किए गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने निम्नलिखित विचार व्यक्त किएः
मेजर ओ. गोरे द्वारा लिया गया साक्ष्य
प्रश्न-3806 आप मुस्लिम लीग की तरफ से यहां आए हैं, जो कि भारत में मुसलमानों
का सबसे बड़ा संगठन है।
उत्तरः जी, हां।
प्रश्न-3807 मैं इस बात से काफी प्रभावित हुआ कि आपने प्रश्न के उत्तर में और
इस अवसर पर दिए अपने प्रारंभिक भाषण में कहीं भी मुसलमानों के
विशेष हितों के बारे में कोई खास उल्लेख नहीं किया। क्या यह इसलिए
है कि आप कुछ नहीं कहना चाहते?
उत्तरः नहीं, लेकिन मैं समझता हूं कि साउथबरो कमेटी ने इसे मान लिया है और
मैंने यह बात कमेटी के सदस्यों पर छोड़ दी है कि वे जो भी प्रश्न करना
चाहें, कर सकते हैं। मैंने लखनऊ बंदोबस्त सेटलमेंट में बढ़-चढ़ कर हिस्सा
लिया था। उस समय मैं मुसलमानों का प्रतिनिधित्व कर रहा था।
प्रश्न-3809 क्या आप ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की तरफ से इस समिति से भारत
सरकार के इस प्रस्ताव को नामंजूर करने को कहेंगे?
उत्तरः मैं यह बात कहने का अधिकारी हूं कि आप भारत सरकार के बंगाल
संबंधी प्रस्ताव को नामंजूर करें, अर्थात् बंगाली मुसलमानों को लखनऊ
पैक्ट में दिए गए प्रतिनिधित्व से ज्यादा प्रतिनिधित्व दें।
प्रश्न-3810 आपने कहा कि आपने भारत के दृष्टिकोण से कहा। क्या आप वास्तव
में एक भारतीय राष्ट्रवादी के रूप में बोल रहे हैं?
उत्तरः जी, हां।
प्रश्न-3811 ऐसी सोच में, क्या आप मुसलमान समुदाय के पृथक प्रतिनिधित्व को
शीघ्रातिशीघ्र समाप्त करने का विचार रखते हैं?
उत्तरः मैं ऐसा समझता हूं।
प्रश्न-3812 इसका अभिप्राय है कि निकट भविष्य में आप मुसलमानों और हिंदुओं
के बीच राजनीतिक जीवन का भेदभाव समाप्त करना चाहते हैं?