12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 329

320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

उत्तरः जी, हां। जब ऐसा क्षण आएगा, तो उससे ज्यादा खुशी मुझे कभी नहीं

होगी।

प्रश्न-3813 क्या आप समझते हैं कि यह कहना सही नहीं है कि भारतीय मुसलमानों

के कुछ विशेष राजनीतिक हित केवल हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान

से बाहर भी हैं, जिन्हें वे विशेष मुस्लिम समुदाय के नाते व्यक्त करने

के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं?

उत्तरः दो बातें हैं। भारत में मुसलमानों के लिए ऐसी बहुत कम बातें हैं

जिन्हें आप उनके विशेष हितों की संज्ञा दे सकते हो - मेरा अभिप्राय

धर्म-निरपेक्ष बातों से है।

प्रश्न-3814 मैं उन्हीं बातों की ओर इशारा कर रहा हूं।

उत्तरः इसीलिए, वास्तव में मैं यह आशा करता हूं कि वह दिन बहुत दूर नहीं

है, जब पृथक निर्वाचन का अंत हो जाएगा।

प्रश्न-3815 इसके साथ क्या यह भी सच है कि भारत के मुसलमान भारत की

विदेश नीति में गहरी रुचि लेते हैं?

उत्तरः जी हां, लेते हैं परंतु बहुत ज्यादा नहीं। आपने जो प्रस्ताव रखा है वह

है तीव्र अभिरुचि का और उनमें से बहुसंख्य अत्यंत प्रबल भावना और

अत्यंत सबल विचार रखते हैं।

प्रश्न-3816 क्या यह भी एक कारण है जिससे आप मुस्लिम संप्रदाय की ओर से

बोलते हुए भारत सरकार को अपने मतदाताओं के प्रति ज्यादा उत्तरदायी

बनाने को उत्सुक हैं?

उत्तरः नहीं।

प्रश्न-3817 क्या आप यह संभव समझते हैं कि भारत ब्रिटिश साम्राज्य में रहते हुए

अपनी एक विदेश नीति बनाए और महाराजाधिराज के लिए, जो अपने

मंत्रियों की सलाह पर चलते हैं, अलग नीति बनाए? उत्तरः मैं एक चीज साफ कर दूं। यह विदेश नीति का सवाल बिल्कुल नहीं

है। भारत के मुसलमान यह समझते हैं कि यह उनके लिए कठिन स्थिति

है। आध्यात्मिक रूप से, सुल्तान या खलीफा उनके स्वामी हैं। प्रश्न-3818 एक समुदाय के?

उत्तरः सुन्नी मतावलंबियो के, जिनकी संख्या सबसे अधिक है। वे भारत में

भारी बहुमत में हैं। हमारे मतानुसार खलीफा ही सारे धार्मिक स्थानों का