322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
प्रश्न-3855 यह महत्वपूर्ण जानकारी है, परंतु यह बात सही है कि ऐसे दंगे अंतर्जातीय
होते हैं। हिंदू एक तरफ और मुसलमान दूसरी तरफ रहते हैं। ऐसे में
क्या यह वांछनीय नहीं होगा कि मिनिस्टर, चाहे वह किसी भी समुदाय
का हो, कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जवाब-देह हो? उत्तरः निश्चित तौर पर।
प्रश्न-3856 क्या यह संभव है?
उत्तरः यदि मैं दूसरी बात कहता हूं तो अपने आप ही अपना भर्त्सना करूंगा।
यदि मैं मिनिस्टर होता तो मैं कहना चाहूंगा कि ऐसे मौके पर मेरे दिमाग
में न्याय के अलावा और कुछ नहीं होगा।
प्रश्न-3857 मैं समझ सकता हूं कि ऐसी स्थिति में आप दूसरे धर्मावलंबियों के
साथ पूरा न्याय करेंगे परंतु इसका दूसरा पहलू भी है और वह यह कि
आपका आत्मगत दृष्टिकोण क्या हो? ऐसी स्थिति में भेदभाव का न
होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि क्या यह नही देखेंगे कि लोगों के मन
में संदेह न हो?
उत्तरः आपका आशय यह है कि एक समुदाय या दूसरे समुदाय के लोग यह
समझें कि उनके या दूसरे समुदाय के साथ न्याय नहीं हो रहा है या
न्याय नहीं होगा?
प्रश्न-3858 हां, क्या बात तटस्थता से अलग नहीं हो जाती है?
उत्तरः मेरा उत्तर है कि ये समस्याएं तेजी से समाप्त हो रही हैं। अभी हाल में
बम्बई के थाणा जिले में ऊपर से नीचे तक सारे अधिकारी हिंदू थे और
मात्र एक चपरासी मुसलमान था और इस मामले में कोई भी शिकायत
नहीं सुनी गई। हाल ही में ऐसा हुआ है। मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूं
कि 10 साल पहले लोगों में यह धारणा थी, जो आप मुझे अब सुझा
रहें हैं, किंतु अब खत्म हो रही है।
लॉर्ड इसलिंग्टन द्वारा लिया गया साक्ष्य
प्रश्न-3807 स........अभी आपने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के बारे में कहा। मेजर
ओर्म्सबी गोरे के प्रश्न के जवाब में आशा जताई कि कुछ ही वर्षों में
आप सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को खत्म कर देंगे, जिसे अब इसलिए लाया
गया है ताकि हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमानों का पूरा प्रतिनिधित्व