राष्ट्रीय कुंठा
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हो सके। आपने कहा कि आप ऐसा चाहते थे। आप के विचार में यह स्थिति कितनी जल्दी पैदा हो सकेगी?
उत्तरः मैं आपको कुछ तथ्य दे सकता हूं और इससे आगे कुछ नहीं कह सकता।
मैं कुछ बातें कहूंगा, जिसके आधार पर आप अपने विचार बना सकते
हैं। 1913 में आगरा में जब मुस्लिम लीग के अधिवेशन में हमने यह
मुद्दा रखा, तो उसमें से 40 प्रतिनिधियों ने कहा कि पृथक निर्वाचन को
खत्म कर देना चाहिए, और लगभग 80 सदस्यों ने, संख्या मुझे ठीक
से याद नहीं है, कहा कि पृथक निर्वाचन रहना चाहिए। यह 1913 की
बात है। इसके बाद से कई अवसर आए हैं जब मैंने मुस्लिम नेताओं से
इस पर बातचीत की है और वे इस मामले में अपना दृष्टिकोण बदलते
रहे हैं। मैं आपको कोई निश्चित समायावधि तो नहीं दे सकता, लेकिन
इतना अवश्य कहता हूं कि यह स्थिति बहुत दिन तक नहीं चलेगी और
शायद दूसरी पूछताछ में आप इसके बारे में कुछ और सुनें।
प्रश्न-3893 आप समझते हैं कि अगले साक्ष्य पर मुसलमान एक ही निर्वाचक-मंडल
के पक्ष में बोलेंगे?
उत्तरः हाँ, मुझे आशा है अगले साक्ष्य तक आप इस बारे में कुछ सुनेंगे।
यद्यपि श्री जिन्ना मुस्लिम लीग की ओर से साक्षी के रूप में उपस्थित हुए थे, लेकिन उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों के प्रति अपनी निष्ठा की राह में लीग की सदस्यता को आड़े नहीं आने दिया। मुस्लिम लीग के सदस्य होने के अलावा श्री जिन्ना होम रूल लीग और कांगे्रस के भी सदस्य थे। जैसा कि उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपने साक्ष्य में कहा, वे तीनों संस्थाओं के सदस्य थे, परंतु वे कांगे्रस से सहमत नहीं थे और न ही मुस्लिम लीग से। कुछ मामलों में वे होम रूल लीग के विचारों से भी सहमत नहीं थे। वे निर्दलीय परंतु राष्ट्रवादी थे, जैसा कि खिलाफतवादी मुसलमानों के साथ उनके संबंधों से स्पष्ट है। 1920 में मुसलमानों ने खिलाफत कांफ्रेंस बनाई। यह इतना शक्तिशाली संगठन बन गया कि मुस्लिम लीग इसकी छाया में आ गई और 1924 तक निर्जीव बनी रही। इन वर्षों में कोई भी मुस्लिम नेता यदि वह खिलाफत कांफ्रेंस का सदस्य नहीं था, तो किसी भी मंच से मुसलमानों को संबोधित नहीं कर सकता था। मुसलमानों का मुसलमानों के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए यही एक मंच था, लेकिन इसके बावजूद श्री जिन्ना ने खिलाफत कांफे्रंस का सदस्य बनने से इंकार कर दिया। निःसंदेह यह इस वजह