12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 339

330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

लाहौर में हुई और श्री बरकत अली इसकी स्वागत समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने पाकिस्तान के बारे में जो विचार ख्4, प्रकट किए, वे उद्धृत करने योग्य हैं। अपनी पार्टी के राजनीतिक विश्वास को बढ़ाने पर बल देते हुए मलिक बरकत अली ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहाः

फ्सर्वप्रथम और सर्वोपरि, हम भारत की पूर्ण स्वतंत्रता और गरिमा में

विश्वास करते हैं। भारत, जो कि हमारा जन्मस्थान है और जिसके साथ

हमारा पे्रम, अमूल्य श्रद्धा और विश्वास जुड़े हुए हैं, वही हमारे पे्रम और

श्रद्धा का प्रथम हकदार है। हम इस दुष्प्रचार में कभी शामिल नहीं होगें,

जो यह कहकर मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काता है कि वे मुसलमान

पहले हैं, भारतीय बाद में। हमारे लिए इस तरह का नारा केवल थोथा ही

नहीं, बल्कि शरारतपूर्ण एवं निरर्थक भी है। हम इस्लाम और उसकी बेहतरी

के लिए किसी भी तरह से भारत के स्थाई हितों के प्रतिकूल कार्य या

उस से टकराव नहीं कर सकते। भारत और भारत में इस्लाम दोनों समरूप

हैं, और जो कुछ भारत के लिए हानिकर है, वही इस्लाम के लिए भी

अहितकर है, चाहे फिर वह आर्थिक रूप से हो, सामाजिक रूप से हो या

फिर नैतिक रूप से। इसलिए वे राजीनीतिज्ञ झूठे मसीहा है और वास्तव में

इस्लाम के शत्रु है, जो यह कहते हैं कि इस्लाम और भारत के हितों के

बीच टकराव है। भारत के बाहर रहने वाले मुसलमान भाइयों जैसे तुर्क,

मिस्र या अरबवासियों के साथ हमारी जो भी सहानुभूति हो, यह निःसंदेह

हमारे लिए आदर्श और अच्छी बात है, परंतु हम इस सहानुभूति को भारत

के मौलिक हितों के खिलाफ नहीं जाने देंगे। वास्तव में हमारी सहानुभूति

उन देशों के लिए तभी कीमती हो सकती है, जब कि उस का उद्गम,

पोषक, एवं स्रोत हमारा महान भारत हो। भगवान करे कभी ऐसा न हो,

जब कोई मुस्लिम ताकत सीमा के उस पार से भारत को गुलाम बनाना

चाहे और भारत के लोगों की मौलिक स्वतंत्रता का हनन करना चाहे। ऐसे

में कोई भी अखिल इस्लामिक अनुभूति, जिसका चाहे जो भी अर्थ हो,

भारत के मुसलमानों को विदेशी मुसलमानों के विरुद्ध लड़ने से नही रोक

सकती।

फ्अतः इस तरह की धारणा किसी भी गैर-मुस्लिम में नहीं होनी

चाहिए। मैं इस बात को जानता हूं कि कुछ संकीर्ण विचारधारा वाले हिंदू

राजनीतिज्ञ लगातार इस बात की दुहाई दे रहे हैं कि उत्तर-पश्चिम सीमा

पर इस्लाम से भारत को खतरा है। परंतु मैं दोहराना चाहूंगा कि इस तरह

के बयान वास्तव में गलत और बेबुनियाद हैं। भारत के मुसलमान भारतीय