12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 343

334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

क्या है? राजनीतिक दार्शनिकों ने इसका विवेचन करते हुए एक समुदाय के बगावतऽ और एक राष्ट्र के विघटन ख्1, के संदर्भ में प्रकाश डाला है।

निष्कर्ष यह है कि एक समुदाय को सुरक्षा का और एक राष्ट्र को अलग होने का अधिकार प्राप्त है। अतः इन दोनों में भेद बिल्कुल स्पष्ट और महत्वपूर्ण हैं, परंतु राजनीतिक विवेचकों ने इससे आगे तर्क नहीं दिए कि ये अधिकार एक के मामले में बगावत तक और दूसरे के मामले में विघटन तक क्यों सीमित है, बल्कि उन्होंने इस प्रश्न को उठाया तक नहीं। उनके द्वारा दिए गए तर्क अपने आप में स्पष्ट भी नहीं लगते, परंतु यह भेद रखा क्यों गया, यह बड़ा रोचक और ज्ञानप्रद प्रश्न है। मेरे विचार में यह भेद अंततः इस बात पर निर्भर करता है कि उनके अंतिम लक्ष्य क्या हैं। राज्य या तो कई समुदायों की एक श्रृंखला से गठित हुआ है अथवा कई राष्ट्रों से। पहले मामले में, एक समुदाय दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा हो सकता है, और दोनों समुदाय एक दूसरे के विरोधी हो सकते हैं, परंतु अपनी अंतिम नियति वे एक ही महसूस करते हैं। परंतु जब कई राज्य अनेक राष्ट्रों से मिलकर बना है और जब एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के खिलाफ उठता है तो उनमें यह संघर्ष अपनी अंतिम नियति की भिन्नता को लेकर होता है। समुदायों और राष्ट्रों के बीच यही भेद होता है, और यह स्पष्ट करता है कि उनके राजनीतिक अधिकारों में क्या अंतर है? इस व्याख्या में कुछ भी मौलिक और नया नहीं है। यह सिर्फ एक राज्य के एक किस्म के अधिकार हैं और दूसरे राज्य के दूसरे किस्म के अधिकार हैं, मात्र इस बात को कहने का तरीका दूसरा है। एक समुदाय को बगावत का अधिकार है, क्योंकि वह इससे संतुष्ट है। वह समुदाय सिर्फ सरकार के शासन के तौर-तरीकों में बदलाव चाहता है। इसका विवाद

  1. विघटन करने के अधिकार पर सिजविक का कहना है कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि एक सरकार

की वैधता के लिए यह जरूरी है कि उसे शासित वर्ग की अनुमति प्राप्त हो। ऐसे लोग यह निष्कर्ष

निकालने में नहीं चूकते कि बहुसंख्यक लोगों का यह अधिकार है कि वे उस राज्य से अलग होकर

अपना अलग राज्य स्थापित कर लें जब ऐसे अल्पसंख्यक लोग जो उस राज्य के किसी एक क्षेत्र में

बहुसंख्यक हों.....मैं समझता हूं कि ऐसे उदाहरण भी हैं जिसमें विघटन होना सभी के हित में हो।

उदाहरण के लिए, जहां एक राज्य के दो भाग सीमाओं या किसी भौगोलिक अवरोध और संचार के

अभाव में अलग-अलग हो गए हों और उन लोगों के बीच धर्म, जाति, भाषा, इतिहास या वर्तमान

सामाजिक परिस्थितियों की वजह से भेद हो, और उन दोनों भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की

विभिन्न आवश्यकताओं, मांगों और सरकार से विभिन्न कानूनों की अपेक्षाएं हों, तो अपेक्षा करना कि

उनके आंतरिक मामलों के लिए एक ही सरकार हो, ठीक नहीं लगता। यह भी हो सकता है कि उनकी

बाहरी आवश्यकताएं भी अलग-अलग हों और इन विभिन्नताओं की वजह से उनमें ज्यादा लड़ाई की

गुंजाइश बनी रहती हो। अतः ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ ऐतिहासिक और देशभक्ति की भावनाओं को

लेकर यह उचित नहीं होगा कि ऐसे अनमोल राज्य के शांतिपूर्ण विघटन को रोक कर, उसको एक ही

इकाई में बांधकर रखा जाये।

µएलिमेंट्स ऑफ पालिटिक्स, 1929, पृ. 648-649