340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
को दिया जाए और आगरा से पेशावर तक मुसलमानों को। मेरा अभिप्राय
हैः एक स्थान से दूसरे स्थान तक लोगों का स्थानांतरण। यह लोगों की
अदला-बदली का विचार है। यह नर-संहार का विचार नहीं है। रूसी क्रांति
व्यक्तिगत संपत्ति के विरुद्ध है। यह सारी संपत्तियों के राष्ट्रीयकरण के लिए
है। परंतु यह बात अदला-बदली तक ही सीमित है। यह व्यावहारिक नहीं
लगती। किंतु यदि यह व्यावहारिक होती, तो हम निश्चित रूप से इसे पसंद
करते, बजाए किसी और व्यवस्था के।
प्रश्नः क्या यह मुख्य विचार है, जो आपको पंजाब से विलय न करने के लिए
पे्ररित करता है?
उत्तरः बिल्कुल।
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प्रश्नः जब आपने इस्लामिक राष्ट्रों के संघ की बात की तो मैं समझता हूं कि
आपके मस्तिष्क में उस समय इसके राजनीतिक पहलू के बजाए धार्मिक
पहलू ही ज्यादा प्रभावी था।
उत्तरः बिल्कुल राजनीतिक। अंजुमन एक राजनीतिक संस्था है। यह बात सही है
कि कोई भी चीज जो मुसलमानों से संबंधित होती है, शुरू में धार्मिक ही
होती हैं, परंतु अंजुमन वास्तव में राजनीति से संबंधित हैं।
प्रश्नः मैं आपके अंजुमन की ओर इंगित नहीं कर रहा था, बल्कि मुसलमानों की
बात कर रहा था। मैं जानना चाहता हूं कि मुसलमान इस्लामिक राष्ट्रों के
संघ के बारे में क्या सोचते हैं? उनके मस्तिष्क में इस संबंध में मुख्यतः
क्या है? क्या यह धार्मिक पहलू है या राजनीतिक पहलू बन गया है?
उत्तरः जैसा कि आप जानते हैं, इस्लाम धार्मिक भी है और राजनीतिक भी।
प्रश्नः अर्थात् राजनीतिक और धार्मिक विचारों का सम्मिश्रण?
उत्तरः निश्चित रूप से।
श्री समर्थ ने इस साक्ष्य को सीमित उद्देश्य से यह दर्शाने के लिए रखा कि उत्तर-पश्चिमी सीमांत सूबे को पंजाब में न मिलाकर उसे अलग से पठान सूबा बनाए रखना, पठानों के भारत के बाहर अफगानिस्तान और दुनिया के अन्य मुस्लिम देशों के साथ संबंधों को देखते हुए खतरनाक होगा। यह साक्ष्य यह भी दर्शता है कि पाकिस्तान की योजना 1923 से पहले ही बन चुकी थी।
ऽ मूल में यही शब्द दर्ज है। छापे की गलती से यह संभवतः कन्याकुमारी के स्थान पर प्रयोग किया गया है।