राष्ट्रीय कुंठा
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एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता, करवाना होगा - जबरन एकता की राजनीति के लिए यह आवश्यक हो गया है।
इस जबरन राजनीतिक एकता की तीसरा नुकसान भी होगा और वह है एक तीसरी पार्टी का आविर्भाव। यदि संविधान का निर्माण होता है, तो यह आपस में शक करने वाले शत्रु राज्यों का संघ होगा, जो अपनी इच्छा से तीसरी पार्टी की उपस्थिति चाहेंगे, जो उनके विवादों को निपटा सके। उनका एक-दूसरे के प्रति शत्रुतापूर्ण नजरिया होने से इन दोनों राष्ट्रों के बीच बातचीत में भी रुकावट आयेगी। आगे चलकर भारत में विपक्ष की एकता भी नहीं रहेगी, जिससे पहले कई लोगों को प्रसन्नता होती थी, क्योंकि ये दोनों राष्ट्र एक-दूसरे के इतने खिलाफ होंगे कि ब्रिटेन के खिलाफ वे कभी एक नहीं होंगे। दूसरी बात यह कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुआ आपसी समझौता ही संविधान का आधार होगा, और ऐसे संविधान के सफल निर्माण के लिए यह जरूरी है कि एक तीसरी पार्टी भी उपस्थित रहे। यह ध्यान देने योग्य है कि इस तीसरी पार्टी के पास काफी सैन्य-शक्ति भी होगी, जिससे वह यह सुनिश्चित करेगी कि इन दोनों के बीच हुआ समझौता टूटने न पाए।
इन सबका अभिप्राय बिल्कुल यही है कि हिंदुओं और मुसलमानों दोनों ने जो राजनीतिक लक्ष्य संजोए हुए हैं और जिन्हें प्राप्त करने की उनकी हार्दिक इच्छा है, उसमें उन्हें निराशा ही मिलेगी। परंतु एक ही देश और एक ही संविधान के तहत दो युद्धरत राष्ट्रों से और अपेक्षा भी क्या की जा सकती है?
अब इस अंधकारपूर्ण दृश्य से हम उस दृश्य की तुलना करें जो भारत को पाकिस्तान और हिंदुस्तान में बांटने से सामने आता है। विभाजन इन दोनों के लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति का वह रास्ता खोलता है, जो ये दोनों अपने लिए निर्धारित करें। उसे चुनने के लिए दोनों स्वतंत्र हैं। मुसलमान पाकिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र या डोमीनियन स्टेटस के रूप में, जो भी उन्हें उचित लगे, चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसी प्रकार हिंदू भी अपने विवेकानुसार हिंदुस्तान के लिए स्वतंत्र या डोमीनियन स्टेटस का दर्जा, जो भी उचित लगे, चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे। इससे मुसलमान, हिंदू राज के भय से मुक्त हो जाएंगे और दोनों के लिए राजनीतिक विकास का रास्ता भी सुगम हो जाएगा। उद्देश्य की प्राप्ति न हो पाने से पैदा निराशा को भी इससे नई आशा मिलेगी। पाकिस्तान और हिंदुस्तान किसी कठोर बाधा से मुक्त होंगे और यदि अल्पसंख्यकों के साथ सांप्रदायिक समझौता एक बुनियादी शर्त रहती है? तो उसे पूरा करना भी कोई दुष्कर काम नहीं होगा। दोनों के रास्ते इस बाधा से मुक्त हैं। पाकिस्तान का एक दूसरा फायदा भी है, जिसका उल्लेख करना जरूरी है। साधारणतः यह माना जाता है कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एक तरह की वैमनस्यता का भाव पैदा हो गया है,