12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 357

348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

और यदि उसे दूर न किया गया तो वह भारत की शांति और उन्नति के लिए घातक सिद्ध होगा। परंतु इस बात का एहसास नहीं किया जाता कि शरारत आपसी मतभेद या वैमनस्य की वजह से इतनी पैदा नहीं होती, जितनी कि इसके प्रदर्शन से। परंतु अब ऐसा नहीं हो सकता। अगर इन दोनों को किसी समान समस्या के काम में भाग लेने को कहा जाता है तो अब उनके बीच छिपी हुई वैमनस्य भावना नहीं झलकेगी, जैसा अब तक हुआ करता था। अतः पाकिस्तान की योजना का फायदा यह भी है कि इससे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जो वैमनस्य है, उसको प्रस्फुटित होने का समान मंच नहीं मिलेगा। इस तरह हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति भंग होने का जो खतरा हमेशा बना रहता है, और जो भारत को पिछले कई वर्षों से झकझोरता रहा है, वह नहीं रहेगा। आखिर में, जो कम महत्वपूर्ण नहीं है, वह है शांति स्थापित करने के लिए तीसरी पार्टी की आवश्यकता को समाप्त करना। एक-दूसरे पर जबरन स्थापित एकता के आपसी अवरोधों से मुक्त होकर हिंदुस्तान और पाकिस्तान बिना किसी आंतरिक अशांति के भय के अलग-अलग, स्थाई, मजबूत और प्रगतिशील राज्य बन सकते हैं। दो अलग-अलग राज्य होने से वे दोनों अपने-अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, जिसे वे एक समग्र के अंग होकर कभी प्राप्त नहीं कर सकते।

जो लोग समग्र भारत चाहते हैं, उन्हें 1923 में कांगे्रस अध्यक्ष के रूप में श्री मुहम्मद अली की बात पर ध्यान देना चाहिए। भारतीय एकता के बारे में बोलते हुए श्री मुहम्मद अली ने कहा थाः

फ्जब तक विपक्ष की भ्रामक एकता के अलावा कोई नई शक्ति भारत

महाद्वीप को एक नहीं कर देगी तब तक यह एक भौगोलिक निरर्थकता ही

रहेगा।य्

क्या ऐसी कोई शक्ति है, जिसका उपयोग करना अभी बाकी है? जब सारे प्रयास विफल हो गए और कांगे्रस ने अपनी सरकार बनाई तो कांगे्रस ने जनसंपर्क-अभिमान में एक नई ताकत को देखा। इसका उद्देश्य था कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं को दरकिनार करके हिंदुओं-मुसलमानों के बीच राजनीतिक एकता स्थापित करना। संक्षेप में, यह ब्रिटिश कंजरवेटिव पार्टी की योजना थी - टोरियों के सोने से लेबर पार्टी को खरीदना। यह योजना जितनी शरारतपूर्ण थी, उतनी ही निरर्थक भी। कांगे्रस यह भूल गई कि कुछ वस्तुएं इतनी कीमती होती हैं कि उनका मालिक, जो उनकी कीमत जानता है, उसको गंवाएगा नहीं और उसे धोखा देने की कोई भी कोशिश निश्चय ही कटुता और आक्रोश पैदा करेगी। किसी भी समुदाय के जीवन में राजनीतिक शक्ति बहुत ही कीमती होती है, विशेषकर जब उसे लगातार चुनौती दी जाए और उसे बार-बार उस चुनौती का सामना करना पड़े। ऐसी स्थिति में राजनीतिक शक्ति ही एक माध्यम है,