2. एक राष्ट्र का अपने घर के लिए आह्वान - Page 36

अधःपतन से मुक्ति

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लोकसम्मति के वास्तविक दायरे का विकृत रूप है। वे निर्देशन-पत्र के अनुच्छेदऽ के मूल पाठ पर भरोसा करते है। और उनकी यह दलील है कि उसमें ‘अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य’ शब्दों का केवल एक ही अर्थ हो सकता है और वह यह कि ऐसा व्यक्ति जिसे समुदाय का विश्वास प्राप्त हो। कांग्रेस द्वारा अपनाई गई स्थिति इस अनुच्छेद के अर्थों से सर्वथा विपरीत है और देश में सभी दलों को तोड़ने के लिए किया जा रहा छद्म प्रयास है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस को ही देश में एकमात्र राजनीतिक दल बनाना है। कांग्रेस के संकल्प-पत्र पर हस्ताक्षर करने की मांग के पीछे इसके अलावा और कोई इरादा नहीं हो सकता। हिंदू ही ऐसे सर्वाधिकारीवादी राज्य की स्थापना के प्रयास का स्वागत कर सकते हैं, परंतु मुसलमानों के लिए तो यह एक स्वतंत्र समाज के रूप में मुसलमानों की राजनीतिक मृत्यु मात्र है।

मुसलमानों का यह रोष तब और अधिक बढ़ गया जब उन्होंने देखा कि गवर्नरों ने, जिन्हें यह देखने का दायित्व सौंपा गया था कि समझौता लागू हो, इस बारे में कोई कदम उठाने से ही इन्कार कर दिया। कुछ गवर्नरों ने तो इस आधार पर इन्कार किया कि वे इस वास्तविकता के कारण असहाय थे कि कांग्रेस ही एकमात्र बहुमत प्राप्त दल है जो स्थिर सरकार का गठन करने में समर्थ है, कि कांग्रेस की ही सरकार बनाना संभव है, और संविधान का निलंबन करने के अलावा इस स्थिति को टालने का अन्य कोई विकल्प नहीं है। अन्य गवर्नरों ने इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि वे कांग्रेस सरकार के सक्रिय समर्थक हो गए थे और उन्होंने कांग्रेस की प्रशंसा करके अथवा खादी पहनकर, जो कांग्रेस पार्टी की अधिकृत वेशभूषा है, पक्षपात का परिचय दिया। कारण चाहे जो भी हो, मुसलमानों को ऐसा लगा कि एक महत्वपूर्ण संरक्षण उनकी रक्षा करने में असफल रहा है।

कांग्रेस ने मुसलमानों के इन आरोपों का दो तरह से उत्तर दिया। पहला तो यह कि वे यह कहते हैं कि मिलाजुला मंत्रिमंडल, मंत्रिमंडलों के सामूहिक दायित्व से असंगत है। इसे मुसलमान एक ईमानदार दलील मानने से इंकार करते हैं। अंग्रेज ही ऐसे पहले लोग हैं, जिन्होंने इसे अपनी शासन प्रणाली का सिद्धांत बनाया। परंतु वहां भी अब इसे त्याग दिया गया है। ब्रिटिश संसद ने इस मुद्दे पर चर्चा कीऽ और वह इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यह अब उतना पावन नहीं रहा है जितना कि कभी इसे

ऽ फ्हमारा राज्यपाल मंत्री-परिषद में मंत्रियों की नियुक्ति के मामले में ऐसे व्यक्ति के परामर्श से, जिसका

विधानमंडल में स्थाई बहुमत होने की संभावना हो, ऐसे लोगों का चयन करेगा (महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक

समुदायों के सदस्यों सहित) जिन्हें विधानमंडल का सामूहिक तौर पर विश्वास प्राप्त हो। इस विधि में

वह इस बात का ध्यान रखेगा कि उसके मंत्रियों में सामूहिक दायित्व की भावना विद्यमान हो।य्