28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
माना जाता था, और इसे त्याग देने से शासन-तंत्र के सुचारू और प्रभावी ढंग से काम-काज का प्रभावित देना जरूरी नहीं है। दूसरे, तथ्यतः कांग्रेस सरकार में कोई सामूहिक दायित्व है ही नहीं। यह सरकार तो विभागों द्वारा चलाई जाती है। प्रत्येक मंत्री दूसरे से स्वतंत्र है और प्रधानमंत्री भी मंत्री के ही तुल्य है। कांग्रेस द्वारा सामूहिक दायित्व की बात करना वास्तव में निरर्थक है। यह दलील असत्य भी है, क्योंकि यह एक हकीकत है कि जिन प्रांतों में कांग्रेस अल्पमत में थी, वहां उसने मिला-जुला मंत्रीमंडल बनाया और अन्य दलों के मंत्रियों से कांग्रेस के संकल्प-पत्र पर हस्ताक्षर करने की मांग नहीं की। मुसलमान यह सवाल कर सकते हैं कि यदि मिली-जुली सरकार बुरी है तो वह एक स्थान पर बुरी और दूसरे पर अच्छी कैसे हो सकती है।
कांग्रेस का दूसरा जवाब यह है कि यदि उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में ऐसे मुस्लिम मंत्री लिए भी हैं जिन्हें मुसलमानों के बहुमत का विश्वास प्राप्त नहीं है, तो भी वे उनके हितों की रक्षा करने में असफल नहीं रहे। वास्तव में उन्होंने मुसलमानों के हितों को बढ़ावा देने के लिए हर बात की है। निस्संदेह यह कथन पोप के उस दृष्टिकोण पर आधारित है जो उन्होंने सरकार के बारे में यह कहकर व्यक्त किया थाः
फ्सरकार के स्वरूप के बारे में मूर्खों को बहस करने दीजिए_
जो श्रेष्ठतम प्रशासन दे सके, वही सरकार सर्वश्रेष्ठ है।य्
ऐसा लगता है कि यह जवाब देते हुए कांग्रेस हाई कमान ने सही तौर पर यह समझा ही नहीं है कि मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों की वास्तविक धारणा क्या रही है। उनका विवाद इस बात को लेकर नहीं है कि कांग्रेस ने मुसलमानों और अल्पसंख्यकों का कुछ भला किया है या नहीं। उनका विवाद सर्वथा अलग मुद्दों को लेकर है। क्या स्वराज के तहत हिन्दू शासक हिन्दू जाति के होंगे और मुसलमान तथा अन्य अल्पसंख्यक उनके प्रजाजन होंगे? मिलेजुले मंत्रिमंडल के लिए की गई मांग में यही मुद्दा निहित है। उस पर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों ने निश्चित रवैया अपनाया है। वे प्रजाजनों की स्थिति स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
यह कहना कि सत्तारूढ़ समुदाय ने शासितों का भला किया है, मुद्दे से सर्वथा अलग है और इसे अल्पसंख्यकों की इस सोच का कोई जवाब नहीं कहा जा सकता कि वे शासित जन जैसा व्यवहार सहन करने को तैयार नहीं है। अंग्रेजों ने भारत में भारतीयों की भलाई के लिए बहुत से काम किए हैं। उन्होंने सड़कों को सुधारा है, नहरें अधिक वैज्ञानिक सिद्धांतों के आधार पर बनाई हैं, रेल का निर्माण कर
ऽ देखिए चुंगी के प्रश्न पर मंत्रिमंडल की असहमति के निर्णय के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री की 22 जनवरी,
1932 की घोषणा और इस विषय पर संसद में वाद-विवाद।