12. राष्ट्रीय कुंठा - Page 363

354 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

है। भारतीय निश्चय ही लड़ रहे हैं और कोई भी यह भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि वे कब लड़ना बंद करेंगे। परंतु इस तथ्य को स्वीकारने पर, यह भी प्रश्न उठता है कि यह किस बात का सूचक है? केवल यह कहना कि भारतीय विवादी होते हैं, इस तथ्य को नहीं मिटा सकता है कि भारत एक भौगोलिक इकाई है। इसकी एकता उतनी ही प्राचीन है, जितनी कि प्रकृति। भौगोलिक एकता के अंतर्गत अत्यंत प्राचीन काल में भी यहां सांस्कृतिक एकता रही है। इसी सांस्कृतिक एकता ने राजनीतिक और जातीय विभाजन की अवहेलना की है, और पिछले 150 वर्षों से सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक, वैधानिक और प्रशासनिक संस्थाएं किसी भी मूल्य पर एक ही और एकसमान उद्गम स्थल से कार्य कर रही हैं। पाकिस्तान के किसी भी विवाद के संदर्भ में यह तथ्य आंखों से ओझल नहीं किया जा सकता कि मूलतः भारत की एकता आधारभूत है। यह तथ्य हृदयंगम करने योग्य है कि विभाजन के वस्तुतः दो मुद्दे हैं, जिनमें स्पष्टतः भेद किया जाना चाहिए। एक मामला वह है, जिसमें प्रारंभ से ही विभाजन की पूर्व स्थिति का दिग्दर्शन होता है, जिसके फलस्वरूप उन भागों का पुनर्विभाजन होने की बात है, जो एक समय अलग थे और तदनंतर एक साथ मिल गए। यह मामला उससे भिन्न है, जिसमें प्रारंभिक मुद्दा सर्वदा एकता की स्थिति का है। परिणामस्वरूप इस मामले में विभाजन का अभिप्राय उस प्रदेश से जो किसी समय एक था अपना संबंध अलग-अलग भागों में विच्छेद कर लेना है। जहां प्रारंभिक मुद्दा प्रदेश की अखंडता से संबंधित नहीं है, अर्थात् एकता होने के पूर्व जहां अलगाव था, वहां विभाजन-जिसका अभिप्राय पुनः अपनी पूर्वावस्था में वापसी है-संभवतः मानसिक आघात न पहुंचाएं। परंतु भारत में प्रारंभिक मुद्दा एकता है। तब यह एकता क्यों छिन्न-भिन्न की जाए, केवल इसलिए कि कुछ मुसलमान असंतुष्ट हैं। इसके टुकड़े क्यों किए जाएं, जबकि ऐतिहासिक काल से यह एक है?

III

क्या पाकिस्तान इसलिए बनना चाहिए क्योंकि हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक तनातनी है? इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता कि उनके बीच तनातनी है। प्रश्न केवल यह है कि क्या यह तनातनी इतनी प्रबल है कि वे एक देश में एक संविधान के अंतर्गत नहीं रह सकते? निश्चित रूप से एक साथ रहने की यह इच्छा 1937 तक उनमें नहीं थी। ‘गवर्नमेंट आफ इंडिया ऐक्ट-1935’ के निर्माण के समय हिंदू-मुसलमानों ने एक देश में एक संविधान के अंतर्गत रहना पसंद किया था और उक्त ऐक्ट के पारित होने के पूर्व उस पर हुयी चर्चा में भाग लिया था। 1920-1935 के बीच सांप्रदायिक तनातनी की क्या स्थिति थी? जैसा कि पूर्वगामी पृष्ठों में रिकार्ड किया गया है, 1920 से 1935 तक का भारतीय इतिहास सांप्रदायिक संघर्ष की