13. क्या पाकिस्तान बनना चाहिए? - Page 368

क्या पाकिस्तान बनना चाहिए

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IV

क्या पाकिस्तान इसलिए बनना चाहिए कि कांगे्रसी बहुमत में अब मुसलमानों का विश्वास नहीं रहा? मुसलमानों द्वारा इसके अनेक कारण बताए गए हैं, जिनमें हिंदुओं द्वारा पैदा किए गए आतंक तथा उन्हें परेशान करने के अनेक उदाहरण दिए गए हैं और कांगे्रसी मंत्रियों ने अपने दो वर्ष तीन महीने के शासनकाल में जिनकी उपेक्षा की है। दुर्भाग्यवश श्री जिन्ना ने इन उत्पीड़क घटनाओं के संदर्भ में जांच-पड़ताल करने के लिए शाही कमीशन बैठाने की अपनी मांग पर आग्रह नहीं किया। अगर उन्होंने आग्रह किया होता, तो यह मालूम हो जाता कि उन शिकायतों में कहां तक सच्चाई थी। मुस्लिम लीग की समितियों द्वारा उल्लिखित रिपोर्टों’ में दिए गए उदाहरणों का अध्ययन करने से पाठक पर यह प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता कि कुछ सच्चाई होने के बावजूद उन शिकायतों में काफी अतिशयोक्ति है। कांगे्रसी मंत्रियों ने इन दोषों को अस्वीकार करते हुए अपने वक्तव्य प्रकाशित किए हैं। हो सकता है कांगे्रस द्वारा अपने दो वर्ष तीन महीने के शासन में राजनीतिज्ञता का प्रदर्शन और अल्पसंख्यकों में विश्वास की भावना उत्पन्न न की गई हो, बल्कि उन्हें दबाया गया हो, परंतु क्या यह सब भारत-विभाजन के लिए एक उपयुक्त कारण हो सकता है? क्या यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे मतदाता, जिन्होंने पिछली बार कांगे्रस का समर्थन किया था, अब अधिक बुद्धिमत्तापूर्वक उसका समर्थन करेंगे? अथवा क्या यह संभव नहीं कि यदि कांगे्रस पुनः शासनारूढ़ होती है और अपनी गलतियों से लाभान्वित होती है, तो वह अपनी शरारतपूर्ण नीति का परित्याग करके अपने गत चरित्र द्वारा उत्पन्न शंका और भय के वातावरण को दूर कर देगी?

V

क्या पाकिस्तान इसलिए बनना चाहिए कि मुसलमान एक राष्ट्र हैं? दुर्भाग्य से, श्री जिन्ना ऐसे समय में पाकिस्तान के उपासक और मुस्लिम राष्ट्रीयता के अभिनेता हुए हैं, जब सारा संसार राष्ट्रीयता की बुराई के विरुद्ध चिल्ला रहा है और किसी भी तरह के अंतर्राष्ट्रीय संगठन में शरण लेना चाहता है।

श्री जिन्ना मुस्लिम राष्ट्रीयता के अपने इस नए विश्वास से इतने आत्मविभोर हैं कि वे इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं हैं कि एक ऐसे समाज के बीच जिसके कुछ हिस्से अलग हो गए हों और एक समाज जिसके कुछ अंग शिथिल

ऽ इस प्रश्न पर कांगे्रस शासित प्रांतों में मुसलमानों की शिकायतों की जांच करने के लिए आल इंडिया

मुस्लिम लीग द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट, जिसे पीरपुर रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है, को

देखें। साथ ही बिहार में मुसलमानों की कुछ शिकायतों की जांच करने के लिए बिहार प्रांतीय मुस्लिम

लीग की रिपोर्ट और 13.3.39 को अमृत बाजार पत्रिका में प्रकाशित इन रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों

का उत्तर देते हुए बिहार सरकार के सूचना अधिकारी द्वारा जारी की गई पे्रस विज्ञप्ति को भी देखें।