क्या पाकिस्तान बनना चाहिए
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हैं। ऐसे सभी समान मुद्दों के मामलों में जिनका आविर्भाव राष्ट्रीयता की आत्मा के फलस्वरूप हुआ है, क्या यह उचित है कि मुस्लिम लीग भेदभावों पर तो बल दे परन्तु एकता में बांधने वाली शक्तियों को भुला दे। यह बात विस्मृत नहीं होनी चाहिए कि यदि दो राष्ट्र अस्तित्व में आते हैं तो इसलिए नहीं कि यह उनकी नियति थी, अपितु इसलिए कि यह सुविचारित मंसूबा है।
जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं, भारत के मुसलमान अब भी कानूनन और यथार्थ में एक राष्ट्र नहीं हैं, और केवल कहा ही जा सकता है कि उनमें राष्ट्र-निर्माण के आवश्यक तत्व मौजूद हैं। परंतु यह मानते हुए कि भारत के मुसलमान एक राष्ट्र हैं, क्या भारत ही एक ऐसा देश है जहां दो राष्ट्रों का अभ्युदय होने वाला है? कनाडा के विषय में क्या विचार है? प्रत्येक व्यक्ति जानता है कि कनाडा में अंगे्रज और फ्रेंच दो राष्ट्र हैं। क्या दक्षिण अफ्रीका में अंगे्रज और डच दो राष्ट्र नहीं हैं? कौन नहीं जानता कि स्विटज़रलैंड में जर्मनी, फ्रेंच और इटालियन, ये तीन राष्ट्र हैं। क्या कानाडा में फ्रेंचों ने विभाजन की मांग की, क्योंकि वे एक पृथक राष्ट्र हैं? क्या अंगे्रजों ने अफ्रीका के विभाजन का दावा किया, क्योंकि बोसनिया से वे एक भिन्न और पृथक राष्ट्र हैं? क्या किसी ने कभी यह सुना है कि जर्मनी, फ्रेंच और इटालियंस ने स्विटज़रलैंड से अलग होने के लिए कोई आंदोलन किया, क्योंकि वे भिन्न-भिन्न राष्ट्र हैं? क्या जर्मंस, फ्रेंच और इटलीवासियों ने कभी यह अनुभव किया है कि यदि वे एक देश में एक संविधान के अंतर्गत एक नागरिक की तरह रहते हैं तो उनकी अपनी निजी संस्कृतियों का लोप हो जाएगा। इसके बावजूद, उक्त सभी विभिन्न राष्ट्रों ने अपनी राष्ट्रीयता तथा संस्कृति की क्षीणता से डरे बिना एक साथ एक संविधान के तहत रहने में संतोष प्रकट किया। कनाडा में अंगे्रजों के साथ रहकर न तो फ्रांसीसी फ्रांसीसीयत से रिक्त हुए और न दक्षिण अफ्रीका में बोर्स के साथ रहकर अंगे्रजों की अंग्रेजियत समाप्त हुई। जर्मस, फ्रेंच तथा इटालियंस एक देश और एक संविधान के साथ समान नाता जोड़ते हुए अभिन्न राष्ट्र रहे। स्विटज़रलैंड का मामला ध्यान देने योग्य है। यह उन देशों से घिरा हुआ है, जिनकी राष्ट्रीयताएं एवं राष्ट्रीयताओं का धार्मिक तथा जातीय संबंध बहुत निकट से स्विटज़रलैंड की राष्ट्रीयताओं से संबद्ध है। उक्त सादृश्यता के होते हुए भी स्विटज़रलैंड के निवासी सर्वप्रथम स्विस हैं, तत्पश्चात् जर्मंस, इटालियंस और फ्रेंच हैं।
कनाडा में फ्रेंच दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेजों और स्विटज़रलैंड में फ्रेंच और इटालियंस के उदाहरण के बाद प्रश्न यह उठता है कि भारत में आखिर ऐसा क्यों नहीं होता? यह मानते हुए कि हिंदू और मुसलमान दो राष्ट्रों में विभाजित हैं, वे एक देश में एक संविधान के अंतर्गत क्यों नहीं रह सकते? दो राष्ट्र-सिद्धांत के आविर्भाव के फलस्वरूप भारत के विभाजन की आवश्यकता क्या है? हिंदुओं के साथ रहने पर