13. क्या पाकिस्तान बनना चाहिए? - Page 374

क्या पाकिस्तान बनना चाहिए

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पर अगर वास्तव में हिंदू राज बन जाता है तो निस्संदेह इस देश के लिए एक भारी खतरा उत्पन्न हो जाएगा। हिंदू कुछ भी कहें, पर हिंदुत्व स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के लिए एक खतरा है। इस आधार पर, प्रजातंत्र के लिए यह अनुपयुक्त है। हिंदू राज को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए। परंतु क्या इसका उपचार पाकिस्तान का बन जाना ही है? किसी देश में बसने वाली विभिन्न जातियों के तुलनात्मक शक्ति-संतुलन के अभाव में सांप्रदायिक राज का निर्माण होता है। जैसा कि ऊपर कहा गया है, संतुलन का यह अभाव भारत में इतना अधिक नहीं पाया जाता जितना कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और स्विटज़रलैंड में है। तो भी कनाडा में कोई ब्रिटिश राज नहीं है, दक्षिण अफ्रीका में कोई डच राज नहीं है। और स्विटज़रलैंड में कोई जर्मन राज नहीं है। पूछा जा सकता है कि किस प्रकार अपने-अपने देश में फ्रेंच, जर्मन, अंगे्रज और इटालियंस बहुतसंख्यक जाति के राज को रोकने में सफल हुए? निश्चय ही विभाजन द्वारा नहीं। उनकी क्या पद्धति है? उनकी पद्धति सांप्रदायिक दलों पर प्रतिबंध लगा देने की है। कोई भी जाति कनाडा, दक्षिण अफ्रीका तथा स्विटज़रलैंड में पृथक सांप्रदायिक दल बनाने के लिए कभी नहीं सोचती। ध्यान देने योग्य बात यह है कि अल्पसंख्यक राष्ट्रीयता सांप्रदायिक पार्टी की रचना के विरोध में अग्रसर होती है, क्योंकि वह जानती है कि यदि उसने किसी सांप्रदायिक दल का निर्माण किया, तो बहुसंख्यक जाति भी सांप्रदायिक पार्टी की रचना करेगी और इसके परिणामस्वरूप बहुसंख्यक जाति बड़ी आसानी से अपना सांप्रदायिक राज स्थापित कर लेगी। लेकिन आत्मरक्षा की यह एक हेय प्रणाली है। इसलिए अल्पसंख्यक राष्ट्रीयताएं इससे पूरी तरह परिचित हैं कि वे किस प्रकार हमारे किले पर छा जाएंगे, अतः उन्होंने सांप्रदायिक राजनीतिक दलों के निर्माण का विरोध किया है।

पर क्या मुसलमानों द्वारा हिंदू राज को टालने की बात सोची गई? क्या उन्होंने कभी यह सोचा कि मुस्लिम लीग की चालू नीति कितनी घातक एवं हानिकारक है? मुसलमान हिंदू महासभा के हिन्दू राज के नारे के विरुद्ध गरज रहे हैं। परंतु इसका उत्तरदायित्व किस पर है? यह हिंदू महासभा और हिंदू राज की बदले की भावना है, जिससे मुसलमानों ने मुस्लिम लीग को जन्म दिया। यह क्रिया और प्रतिक्रिया है, जो एक दूसरे को जन्म देती है। हिंदू राज के भूत को दफनाने के लिए विभाजन को छोड़कर केवल मुस्लिम लीग का भंग हो जाना तथा हिंदू-मुस्लिम जातियों की संयुक्त पार्टी का बन जाना ही एकमात्र प्रभावी मार्ग है। जब तक संवैधानिक सुरक्षाओं के सवाल पर समझौता नहीं होता, तब तक वास्तव में यह संभव नहीं है कि मुस्लिम तथा अन्य अल्पसंख्यक पार्टियों कांगे्रस तथा हिंदू महासभा में भाग लें। परंतु यह निश्चित होना है, और आशा भी है कि इस समझौते के फलस्वरूप मुस्लिम तथा अन्य अल्पसंख्यक जातियां मनचाहे संरक्षण उपलब्ध करा सकेंगी। एक बार इस लक्ष्य की प्राप्ति हो