13. क्या पाकिस्तान बनना चाहिए? - Page 376

क्या पाकिस्तान बनना चाहिए

निम्नलिखित दो प्रस्ताव इस संदर्भ में विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं -

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प्रस्ताव संख्या 7ः

फ्अखिल भारतीय मुस्लिम लीग का यह अधिवेशन भारत सरकार अधिनियम,

1935 की भावना और अर्थ की तीव्र भर्त्सना करते हुए, कांगे्रस द्वारा कतिपय

प्रांतों में मंत्रिमंडलों के निर्माण के विरुद्ध खेद प्रकट करता है, अपना विरोध

प्रकट करता है तथा राज्यपालों की निंदा करता है, क्योंकि वे अपने उन

विशिष्ट अधिकारों को प्रयोग में लाने में असफल रहे हैं, जो उन्हें मुस्लिम

तथा अन्य महत्वपूर्ण अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध

थे।य्

प्रस्ताव संख्या 8ः

फ्यह निर्णय लिया जाता है कि अखिल भारतीय मुस्लिम लीग का ध्येय

स्वतंत्र प्रजातांत्रिक राज्यों के एक संघ के रूप में पूर्ण स्वतंत्रता स्थापित

करना है, जिसमें मुसलमानों तथा अन्य अल्पसंख्यकों के हितों और अधिकारों

की सुरक्षा संविधान में प्रभावपूर्ण ढंग से हो सके।य्

दिसंबर 1938 में संपन्न मुस्लिम लीग के दूसरे वार्षिक अधिवेशन में इसी प्रकार के अनेक प्रस्ताव पारित किए गए। उनमें निम्न प्रस्ताव संख्या 10 विचारणीय है-

फ्अखिल भारतीय मुस्लिम लीग अपना यह दृष्टिकोण दोहराती है कि संघ

की परियोजना, जो भारत सरकार अधिनियम, 1935 में सन्निहित है, स्वीकार

करने योग्य नहीं है, परंतु जो आगे उन्नति हुई है या समय-समय पर हो

सकती है, एतदर्थ लीग अपने अध्यक्ष को अधिकार प्रदान करती है कि

वे ऐसा मार्ग अपनाएं, जो आवश्यक हो, जिससे उन उचित विकल्पों की

संभावनाओं की खोज की जा सके, जिनके फलस्वरूप मुसलमानों और

अन्य अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा हो सके।य्

उक्त प्रस्तावों द्वारा श्री जिन्ना ने यह दिखाया कि वह मुस्लिम और गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच एक सामान्य मंच के पक्ष में हैं। दुर्भाग्यवश निष्पक्षता तथा राजनीतिज्ञता, जो उक्त प्रस्तावों में सन्निहित थी, अधिक समय तक नहीं रह सकी। 1939 में श्री जिन्ना ने एक छलांग लगाई और पाकिस्तान के पक्ष में वह शरारतपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए मुसलमानों को पृथक करने की खतरनाक एवं विनाशकारी अलगाववादी नीति की रूपरेखा तैयार की। इस अलगाव का क्या कारण है? कोई कारण नहीं, केवल विचारधारा में परिवर्तन कि मुसलमान एक राष्ट्र हैं, एक जाति नहीं। किसी व्यक्ति को इस सवाल पर झगड़ना नहीं चाहिए कि मुसलमान एक राष्ट्र है अथवा जाति। परंतु यह बात समझना बहुत कठिन है कि किस प्रकार यह तथ्य कि