368 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
मुसलमान एक राष्ट्र हैं, राजनीतिक अलगाव की एक सुरक्षित और सार्थक नीति का द्योतक है। दुर्भाग्यवश मुसलमान इस बात का अनुभव नहीं करते कि उक्त नीति के फलस्वरूप श्री जिन्ना ने उन लोगों का कितना अहित किया है, परंतु मुसलमान यह तो सोच ही सकते हैं कि मुस्लिम लीग को मुसलमानों का एकमात्र संगठन बनाकर श्री जिन्ना ने क्या पाया? हो सकता है उक्त प्रक्रिया के फलस्वरूप उनके सामने किसी अन्य व्यक्ति के नेतृत्व प्राप्त करने की संभावना न रही हो, क्योंकि मुस्लिम शिविर में उन्हें स्वयं सर्वप्रथम स्थान प्राप्त होने का पूर्ण विश्वास रहा है। परंतु लीग हिंदू राज्य से मुसलमानों के अलगाव की योजना द्वारा किस प्रकार अपने को बचा सकती है? जिन प्रांतों में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं, क्या पाकिस्तान वहां हिंदू राज्य के निर्माण की संभावना को रद्द कर सकता है? स्पष्टतः वह ऐसा नहीं कर सकता। अगर पाकिस्तान बना तो अल्पसंख्यक मुस्लिम प्रांतों में यह बात अवश्य होगी। अब संपूर्ण भारत पर दृष्टिपात कीजिए। क्या पाकिस्तान उन मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बल पर, जो हिंदुस्तान में बचे रहेंगे, केंद्र में हिंदू राज स्थापित करने में रुकावट डाल सकता है? स्पष्ट है कि ऐसा नहीं हो सकता। तब पाकिस्तान का क्या औचित्य रहा? क्या वह उन बहुसंख्यक मुस्लिम प्रांतों में, जहां पर कभी भी हिंदू राज नहीं बन सकता, हिंदू राज की स्थापना को रोक सकता है? दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि पाकिस्तान मुसलमानों के लिए वहां अनावश्यक है जहां वे बहुसंख्यक हैं, क्योंकि वह हिंदू राज की स्थापना का कोई भय नहीं है। वह स्थिति मुसलमानों के लिए निरर्थक होने की अपेक्षा और भी बुरी है, जहां मुसलमान अल्पसंख्यक हैं, क्योंकि पाकिस्तान हो अथवा नहीं, हिंदू राज का सामना उन्हें करना पड़ेगा। क्या राजनीति मुस्लिम लीग की इस राजनीति से भी अधिक खराब हो सकती हैं, मुस्लिम लीग ने अल्पसंख्यक मुसलमानों के हितों का आलिंगन करते हुए बहुसंख्यक मुस्लिमों की वकालत करके उन्हें समाप्त किया। लीग के मौलिक लक्ष्य में कितना हेरफेर हुआ, कितना पतन एक हास्यास्पद स्थिति तक हुआ, यह देखा जा सकता है। हिंदू राज के विरुद्ध विभाजन का विकल्प और अधिक बुरा है।
VI
पाकिस्तान को लेकर मुस्लिम दृष्टिकोण में जो त्रुटियां हैं, उनमें से कुछ मेरे सामने आ चुकी हैं। और भी त्रुटियां हो सकती हैं, जो मेरी समझ में न आई हों। किंतु उनकी जो सूची इस समय है, वह भी काफी बड़ी है। मुसलमान उन्हें किस तरह दूर करने की सोचते हैं, यह प्रश्न मुसलमानों के लिए है, मेरे लिए नहीं। इस विषय का विद्यार्थी होने के नाते मेरा कर्तव्य उन त्रुटियों को जता देना है। वह मैंने कर दिया। कोई और प्रश्न मेरे पास उत्तर देने को नहीं है।