374 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
वह अंधकार में भटक जाता। भूगोल ने आयरलैंड को एक राष्ट्र बनाने का
कठिन कार्य किया, इतिहास ने इसके विपरीत कार्य किया है। बात इतनी है
कि आयरलैंड द्वीप और आयरलैंड की राष्ट्रीय यूनिट एक नहीं हैं। अंतिम
विश्लेषण यह है कि राष्ट्रीयता की परीक्षा लोगों की इच्छा है।य्
ये शब्द वास्तविकता के धरातल से निकले गंभीर विचार हैं। खेद है कि भारत में इनका अभाव है।
दूसरे मसले पर मैं भारत का मुस्लिम भारत और गैर-मुस्लिम भारत में विभाजन बेहतर समझता हूं जो कि दोनों को सुरक्षा प्रदान करने का सबसे पक्का और सुरक्षित तरीका है। अवश्य ही दोनों विनल्पों में से यह अधिक सुरक्षित है। मैं जानता हूं कि यह तर्क दिया जाएगा कि स्वतंत्र और संयुक्त भारत के प्रति दो राष्ट्र-सिद्धांत की छूत से पैदा होने वाली मुसलमान सेना की वफादारी के प्रति आशंका केवल काल्पनिक आशंका है। यह बेशक सही है। मेरे द्वारा चुने गए विकल्प की उपयुक्तता से इसका कोई विरोध नहीं है। मैं गलत हो सकता हूं। किंतु मैं विरोध की आशंका न रखते हुए और निश्चित रूप से वर्क के शब्दों का प्रयोग करते हुए, यह कह सकता हूं कि सुरक्षा पर भारी भरोसा रखकर नष्ट होने की बजाय सुरक्षा पर अतिशय ध्यान देने के लिए हंसाई कराना बेहतर है। मैं मामलों को इत्तिफाक पर छोड़ देना नहीं चाहता। भारत की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय को संयोग पर छोड़ देना सबसे बड़ा अपराध करना है।
पाकिस्तान के लिए मुसलमानों की मांग को कोई मंजूर नहीं करेगा, जब तक कि उसे इसके लिए मजबूर न किया जाए। साथ ही जो बात सुनिश्चित है, वह यह कि साहस एवं सामान्य समझबूझ से उसका सामना न करना भूल होगी। यह भूल ऐसी ही होगी जैसे उस भाग को खो देना, जिसको स्थाई रखने के लिए व्यर्थ प्रयत्न करके बचाया जा सकता है।
इन्हीं कारणों से मेरा ख्याल है कि यदि पाकिस्तान के मसले पर मुसलमान झुकते नहीं हैं, तो पाकिस्तान बन कर रहेगा। जहां तक मेरा संबंध है, केवल यही महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या मुसलमान पाकिस्तान बनाने पर तुले हुए हैं? या पाकिस्तान केवल एक पुकार है? क्या यह केवल एक क्षणिक विचार है या यह उनके स्थायी उत्साह का प्रतीक है? इस बात पर मतभेद हो सकता है। एक बार यह निश्चित हो जाने पर कि मुसलमान पाकिस्तान चाहते हैं, तो इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि इस सिद्धांत को मान लेना ही बुद्धिमानी की बात होगी।