13. क्या पाकिस्तान बनना चाहिए? - Page 385

376 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

तूफानी आंदोलन चला रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश का वातावरण दूषित हो रहा है, तथापि उन्होंने पाकिस्तान की सीमाओं के बारे में कोई भी ब्यौरा अपने आलोचकों के सम्मुख नहीं पेश किया है। श्री जिन्ना लगातार कहते आए हैं कि सीमाओं के बारे में इस समय कोई भी बात करना असामयिक है और इस विषय में पाकिस्तान के सिद्धांत को अंगीकार करने के उपरांत बहस की जा सकती है। यह एक नपा-तुला उत्तर हो सकता है, परंतु वास्तव में इससे उन व्यक्तियों को कोई सहायता नहीं मिल सकती, जो यथाशक्ति निष्पक्ष रूप से इस समस्या के शांतिपूर्ण समाधान हेतु सहायता देने को तत्पर हैं। लगता है श्री जिन्ना पर इस बात का प्रभाव पड़ा है कि यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तान के सिद्धांत को मानने के लिए तैयार होता है, तो वह उनकी पाकिस्तान-योजना को स्वीकार करने के लिए बाध्य होगा। इससे बड़ी भूल दूसरी नहीं हो सकती। एक व्यक्ति पाकिस्तान के सिद्धांत, अर्थात् भारत-विभाजन को माने, यह तो ठीक है परंतु यह समझना कठिन है कि वह श्री जिन्ना के पाकिस्तान की योजना को मानने को किस प्रकार बाध्य हो सकता है। वास्तव में यदि पाकिस्तान की कोई योजना उसके लिए संतोषप्रद नहीं है, तो वह पाकिस्तान के किसी दूसरे रूप का विरोध करने के लिए भी बिल्कुल स्वतंत्र होगा, यद्यपि पाकिस्तान के सिद्धांत के पक्ष में वह भले ही हो। इसीलिए पाकिस्तान की योजना और पाकिस्तान का सिद्धांत, दोनों बिल्कुल भिन्न-भिन्न बातें हैं। इस दृष्टिकोण में कोई गलती नहीं है। उदाहरणस्वरूप कहा जा सकता है कि आत्मनिर्णय का सिद्धांत एक विनाशकारी तत्व की तरह है। कोई भी व्यक्ति इसका प्रयोग करने के लिए सिद्धांततः तभी इसे स्वीकार कर सकता है, जब उस अवसर की आवश्यकता और गंभीरता प्रमाणित हो गई हो। परंतु कोई भी व्यक्ति इस विनाशकारी प्रयोग को तब तक अंगीकार नहीं कर सकता, जब तक कि वह यह न जान ले कि किस क्षेत्र को इस विस्फोटक द्वारा उड़ाना है। यदि यह विस्फोटक संपूर्ण ढांचे को उड़ाने जा रहा है अथवा यदि किसी विशेष भूखंड पर इसका उपयोग सीमित करना संभव प्रतीत नहीं होता है, तो ऐसे विस्फोटक की उपयोगिता का परित्याग किया जा सकता है और समस्या के समाधान के लिए कोई अन्य साधन उपयोग में लाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में, पाकिस्तान के सिद्धांत को कार्यान्वित करने के लिए सर्वप्रथम यह आवश्यक है कि सीमा-रेखाओं का हम विस्तृत ज्ञान प्राप्त कर लें। पाकिस्तान के विश्वसनीय सूत्रधार के लिए यह भी आवश्यक है कि पाकिस्तान-योजना के महत्वपूर्ण ब्यौरे को वे जनता से न छिपाएं। पाकिस्तान की सीमाओं की घोषणा न करने में श्री जिन्ना ने जिस हठधर्मी का प्रदर्शन किया है, वह एक राजनयिक के लिए अक्षम्य है। तो भी उन लोगों को, जो पाकिस्तान के सवाल का समाधान करने में दिलचस्पी रखते हैं, पाकिस्तान-समस्या के समाधान की तब तक प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, जब तक श्री जिन्ना विनीत भाव से उसका पूर्ण