13. क्या पाकिस्तान बनना चाहिए? - Page 386

पाकिस्तान की समस्याएं 377

विवरण नहीं देते। कतिपय कल्पनाओं के आधार पर इस तर्क को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस विवाद में मैं यह कल्पना करता हूं कि मुस्लिम लीग चाहती है कि पश्चिमी पाकिस्तान की सीमाएं पश्चिमी सीमा प्रांत, पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान की मौजूदा सीमाएं हों और पूर्वी पाकिस्तान की सीमाएं बंगाल प्रांत की मौजूदा सीमाएं हों, जिसमें आसाम के कुछ और जिले भी सम्मिलित हों।

III

विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या उक्त दावा न्यायसंगत है? कहा गया है कि इस दावे का आधार आत्मनिर्णय का सिद्धांत है। इस दावे की न्यायसंगतता को समझने के लिए जरूरी है कि हम आत्मनिर्णय के सिद्धांत की सीमाओं को भली प्रकार समझ लें। इसके लिए यह समझना परम आवश्यक है कि हम इस प्रश्न की शुरुआत यहां से करें कि आत्मनिर्णय के उक्त सिद्धांत का कानूनन तथा यथार्थवादी अनुमान क्या है? गत कुछ वर्षों से आत्मनिर्णय की शब्दावली प्रचलित हो गई है। परंतु यह उस तथ्य का विवेचन करती है जो अधिक पुराना है। आत्मनिर्णय की धारणा के अंतर्गत दो धाराएं विकसित हो गई हैं। उन्नीसवीं सदी की अवधि में आत्मनिर्णय का अर्थ उस अधिकार से था, जिसके फलस्वरूप जनता की इच्छा के अनुकूल सरकार की स्थापना की जा सके। दूसरे, इसका तात्पर्य यह था कि हम आत्मनिर्णय के अधिकार द्वारा विदेशियों से ऐसी राष्ट्रीय स्वतंत्रता प्राप्त कर सकें, जिसमें सरकार के स्वरूप का कोई बंधन न हो। पाकिस्तान का आंदोलन आत्मनिर्णय के इस दूसरे दृष्टिकोण के संदर्भ में है।

पाकिस्तान पर वाद-विवाद को सीमित करते हुए मैं इस परिप्रेक्ष्य में यह कहना चाहता हूं कि आत्मनिर्णय से सम्बद्ध इन मुद्दों पर विचार किया जाए।

सर्वप्रथम, आत्मनिर्णय जनता द्वारा होना चाहिए। यह बिंदु इतना सरल है कि इसे बताने की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। परंतु इस पर बल देना आवश्यक हो गया है। हिंदू और मुसलमान दोनों आत्मनिर्णय के इस विचार के साथ छल-कपट कर रहे हैं। पाकिस्तान के अंतर्गत किसी एक क्षेत्र का दावा मुसलमानों द्वारा इसलिए किया जाता है, क्योंकि वहां की जनता मुस्लिम है, अथवा वहां का शासक मुस्लिम है यद्यपि उस क्षेत्र की बहुसंख्यक जनता गैर-मुस्लिम है। भारत में मुस्लिम लीग आत्मनिर्णय के लाभ का दावा कर रही है, फिलिस्तीन के मामले में इसका विरोध कर रही है। लीग द्वारा यह दावा किया जाता है कि कश्मीर एक मुस्लिम राज्य है, क्योंकि यहां की बहुसंख्यक जनता मुस्लिम है और हैदराबाद पर इसलिए दावा किया जाता है, क्योंकि वहां का शासक मुस्लिम है। इसी प्रकार हिंदू महासभा भी उस क्षेत्र को हिंदुस्तान में सम्मिलित करने का दावा करती है, क्योंकि वहां की जनता