13. क्या पाकिस्तान बनना चाहिए? - Page 388

पाकिस्तान की समस्याएं

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संभव नहीं है कि किसी राष्ट्र के आत्मनिर्णय के संबंध में दूसरे राष्ट्र का

हस्तक्षेप सही है या नहीं, करें। यह मामला अपनी-अपनी सोच का है और

इस पर ईमानदार और निष्पक्ष सोच वाले व्यक्तियों के विचार भिन्न-भिन्न

हो सकते हैं।य्

इसके दो कारण हैं-सर्वप्रथम, राष्ट्रीयता एक ऐसा पवित्र और संपूर्ण सिद्धांत नहीं है, जिसे कोई स्पष्ट आवश्यक चरित्र की संज्ञा दी जा सके और जो दूसरी विचारधाराओं से ऊपर हो_ द्वितीय, किसी स्पष्ट राष्ट्रीयता के पोषण और स्थायित्व के लिए अलगाव अनिवार्य तत्व नहीं है।

आत्मनिर्णय के संबंध में एक तीसरी बात ध्यान देने योग्य है। किसी राष्ट्र का आत्मनिर्णय, सांस्कृतिक स्वतंत्रता का अथवा क्षेत्रीय स्वतंत्रता का स्वरूप ले सकता है। वह कौन सा स्वरूप लेगा, यह जनसंख्या के क्षेत्रीय खाके पर आधारित है। यदि राष्ट्रीयता सरलतापूर्वक पृथक करने योग्य अथवा साथ लगे क्षेत्रों में निवास करती हैं तो अन्य बातें समान होने पर क्षेत्रीय स्वतंत्रता के लिए कोई भी मामला बनाया जा सकता है। लेकिन जहां राष्ट्रीयताएं इस प्रकार एक-दूसरे से मिली-जुली तथा मिश्रित हों कि ऐसे क्षेत्र, जिन पर उनका अधिकार हो, आसानी से पृथक नहीं किए जा सकते हों, तो वहां सांस्कृतिक स्वतंत्रता का ही औचित्य है। ऐसे मामलों में क्षेत्रीय विभाजन असंभाव्य हैं। विवश होकर उन्हें साथ रहना पड़ेगा। दूसरा विकल्प केवल यह है कि वे वहां से स्थानांतरण कर दें।

IV

आत्मनिर्णय की मर्यादाओं तथा क्षेत्र की परिभाषा करने के बाद अब हम सरलतापूर्वक पाकिस्तान के सीमा विषयक प्रश्न पर विचार कर सकते हैं। इन विचारों के परिपे्रक्ष्य में, मुस्लिम लीग का यह दावा कि मौजूदा सीमाएं पाकिस्तान की सीमाएं रहें, कहां तक उचित है? इस प्रश्न का उत्तर मेरी समझ में सुस्पष्ट है। ऐसा लगता है कि भौगोलिक ढांचे से उक्त प्रश्न का समाधान हो रहा है और इसमें किसी विशेष तर्क की आवश्यकता नहीं है। पश्चिमी सीमांत प्रदेश, बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में हिंदू और मुस्लिम जनता मिश्रित है। हिंदुओं के लिए इन प्रांतों में क्षेत्रीय विभाजन का प्रश्न असंभव प्रतीत होता है। उन्हें अपनी सांस्कृतिक स्वतंत्रता तथा अन्य ऐसे राजनीतिक हितों की सुरक्षा की ओर ध्यान देना है जो उनकी सुरक्षा के लिए उपलब्ध हो सकें। पंजाब और बंगाल का मामला भिन्न प्रकार का है। मानचित्र की ओर दृष्टिपात करने पर हमें ज्ञात होता है कि उक्त दो प्रांतों में अन्य प्रांतों की अपेक्षा जनसंख्या का ढांचा