382 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
श्री जिन्ना यहां एक बात में बिल्कुल चूक गए हैं। उनके आलोचकों द्वारा उठाया गया प्रश्न आमतौर पर गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के संबंध में नहीं था_ यह पंजाब और बंगाल में गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के संदर्भ में था। क्या श्री जिन्ना उन गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के मामले का निपटारा करना चाहते हैं जो उनके सिद्धांत के फलस्वरूप एक ठोस और सरलतापूर्वक विभक्त किए जाने वाले प्रदेश में बसे हुए हैं? यदि ऐसा है, तो कहा जा सकता है कि उनकी इससे अधिक अपरिपक्व प्रस्तावना को किसी भी राजनीतिक साहित्य में पाना कठिन है। उपराष्ट्र की धारणा कभी भी सुनने में नहीं आई। यह केवल चालाकी भरी धारणा ही नहीं है, अपितु यह एक असंगत धारणा है। उपराष्ट्र का सिद्धांत किस अर्थ का सूचक है? यदि मैं इस भ्रामक धारणा को सही तरह समझ पाया हूं तो इसका अर्थ यही है कि किसी उपराष्ट्र को राष्ट्र से पृथक नहीं होना चाहिए, चाहे वह पृथकत्व संभाव्य ही हो। इसका अर्थ यही होता है कि किसी राष्ट्र और उपराष्ट्र के बीच के संबंधा उन संबंधों की अपेक्षा इतने प्रगाढ़ नहीं होते हैं, जितने किसी व्यक्ति और उसकी चल संपत्ति अथवा संपत्ति के बीच होते हैं। चल संपत्ति स्वामी के साथ चली जाती है और मूल्य जायदाद के साथ जाता है। इसी प्रकार उपराष्ट्र के साथ जाता है। श्री जिन्ना के तर्क में ऐसी ही धारणा है। परंतु क्या श्री जिन्ना का तर्क गंभीरतापूर्वक यही है कि पंजाब और बंगाल के हिंदू मात्र चल संपत्ति हैं, जिनकों वहां चला जाना चाहिए था, जहां पंजाब और बंगाल के मुसलमान उन्हें खदेड़ना चाहें? इस प्रकार का तर्क इतना बेतुका है कि कोई भी विवेकशील व्यक्ति इसका समर्थन नहीं कर सकता। यह एक बिल्कुल ही न्याय-विरुद्ध तर्क है और श्री जिन्ना जैसे परिपक्व कानूनदां को निश्चय ही इसका सहज ज्ञान होना चाहिए। यदि कोई छोटा राष्ट्र संख्या अनुसार किसी बड़े राष्ट्र की तुलना में उपराष्ट्र है और प्रदेशीय विभाजन का उसे ऐसा अधिकार नहीं है, तब ऐसा क्यों नहीं कहा जा सकता कि संपूर्ण भारत के संदर्भ में हिंदू एक राष्ट्र हैं और मुसलमान एक उपराष्ट्र हैं और उपराष्ट्र होने के नाते उन्हें आत्मनिर्णय अथवा क्षेत्रीय विभाजन का कोई अधिकार नहीं है?
पाकिस्तान की वास्तविकता के विषय में कटु संदेह पहले ही है। चाहे वह ठीक हो या गलत, परंतु ज्यादातर लोग यह संदेह करते हैं कि पाकिस्तान में बुराई छिपी हुई है। उनके विचार से इसके दो उद्देश्य हैं। एक तात्कालिक उद्देश्य, जिसका अर्थ पड़ौसी मुस्लिम देशों के साथ गठजोड़ करके एक मुस्लिम फेडरेशन का निर्माण करना है, और दूसरा अंतिम उद्देश्य मुस्लिम फेडरेशन के लिए यह है कि वह हिंदुस्तान पर आक्रमण करके हिंदुओं को जीतें और उन पर विजय प्राप्त करें ओर भारत में मुस्लिम समाज की स्थापना करें। अन्य लोग सोचते हैं कि पाकिस्तान उस योजना की पराकाष्ठा है, जिसमें श्री जिन्ना की 14 मांगों के अंतर्गत पृथक मुस्लिम प्रांतों की रचना की बात