पाकिस्तान की समस्याएं
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कही गई है। कोई भी व्यक्ति मुसलमानों के मन की गहराई को नहीं समझ सकता और यह भी नहीं जान सकता कि उनकी मांगों के पीछे क्या रहस्य है। यदि पाकिस्तान के विरोधी हिंदू यह शंका करते हैं कि मुसलमानों का वास्तविक अभिप्राय कुछ और है तो वे इस पर ध्यान देकर तदनुसार योजना बना सकते हैं। पाकिस्तान का विरोध वे इस आधार पर नहीं कर सकते क्योंकि इसके पीछे नीयत में खोट है। परंतु श्री जिन्ना से यह पूछने का अधिकार उन्हें अवश्य है कि पाकिस्तान के अंतर्गत सांप्रदायिक समस्या को वे क्यों रखना चाहते हैं? पाकिस्तान के पीछे कितना ही कुटिल अभिप्राय हो, परंतु इसमें एक अच्छाई तो अवश्य होनी चाहिए। पाकिस्तान का आदर्श यह होना चाहिए कि उसके अंतर्गत कोई भी सांप्रदायिक समस्या न रहे। कम से कम यह एक अच्छाई है जिसकी पाकिस्तान से मांग की जा सकती है। यदि पाकिस्तान में भी भारत की तरह सांप्रदायिकता का उत्पात होता है, तो ऐसे पाकिस्तान से क्या लाभ? इसका स्वागत तभी किया जाना चाहिए जब वह सांप्रदायिक समस्या से परे हो जाये। इसका एकमात्र समाधान यह है कि इसकी सीमाओं का सीमांकन इस प्रकार से हो कि यह एक जातिगत राज्य हो, जिसमें अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक एक दूसरे के विरुद्ध न
खड़े हों। सौभाग्य से यह एक जातिगत राज्य बन सकता है, यदि श्री जिन्ना इसकी स्वीकृति प्रदान करें। शंका का मुख्य कारण इसमें ही निहित है, और श्री जिन्ना इसे दूर करने के बावजूद इसको बेकार, न्यायविरुद्ध तथा राष्ट्र और उपराष्ट्र जैसे बनावटी भेदों के कारण और गहरा कर रहे हैं।
क्या श्री जिन्ना के लिए इस प्रकार के निरर्थक तथा न्यायविरुद्ध प्रस्तावों का कार्यान्वयन करने और जो न बचाने योग्य है उसे बचाने तथा जो न्यायपूर्ण है उसका विरोध करने की अपेक्षा यह अधिक उपयुक्त नहीं है कि वही करें जो सर एडवर्ड कार्सन ने अल्सटर की सीमाओं के पुनः सीमांकन के लिए किया था। जो लोग आयरिश होमरूल के पारित होने की जानकारी रखते हैं, उन्हें मालूम है कि 23 सितंबर, 1911 में क्रेगांवन सभा में सर एडवर्ड कार्सन ने अल्सटर में अपनी वह नीति निर्धारित की थी कि अल्सटर में एक इंपीरियल पार्लियामेंट की सरकार अथवा अल्सटर की सरकार होगी, परन्तु होम रूल सरकार कभी नहीं होगी। चूंकि शाही संसद अपनी सरकार की वापसी का प्रस्ताव प्रस्तुत कर रही थी, अतएव इस नीति का अर्थ था कि अल्सटर के लिए एक स्थाई सरकार हो। उस प्रस्ताव में उक्त नीति का समावेश था, जो अल्सटर यूनियनिस्ट काउंसिल, काउंटी ग्रांड ओरंज लोजेज और यूनियनिस्ट क्लब के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में 25 सिंतबर, 1911 को बेलफास्ट में पारित हुआ था। अल्सटर की अस्थाई सरकार का कार्यान्वयन उसी दिन होना था जिस दिन स्वायत्त शासन का बिल पारित हुआ था। इस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थाई